दैनिक भास्कर हिंदी: राज्यों को कोरोना टेस्ट की कीमत कम करनी चाहिए : आईसीएमआर

May 27th, 2020

हाईलाइट

  • राज्यों को कोरोना टेस्ट की कीमत कम करनी चाहिए : आईसीएमआर

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 के परीक्षण (टेस्ट) की कीमत कम करने के बारे में पत्र लिखा है।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 25 मई को भेजे गए पत्र में आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव ने कहा ने कहा कि राज्यों को निजी प्रयोगशालाओं के साथ बातचीत करके परीक्षण के लिए एक मूल्य तय करना चाहिए।

उन्होंने कहा, बहुत पहले, 17 मार्च को अधिकतम कीमत 4500 रुपये सुझाई गई थी, जो अब लागू नहीं रहेगी। इसलिए सभी राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सलाह दी जाती है कि वे निजी प्रयोगशालाओं से बातचीत करें और सरकार द्वारा भेजे जा रहे नमूनों के लिए आपसी सहमति से मूल्य तय करें।

उन्होंने सरकार द्वारा भेजे गए नमूनों के साथ ही निजी तौर पर भेजे गए नमूनों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

यानी जांच किट में लगने वाले सामान की कीमतों को ध्यान में रखते हुए 17 मार्च के उस आदेश को वापस ले लिया गया है, जिसमें वायरस की जांच के लिए अधिकतम राशि 4500 रुपये तय की गई थी।

भार्गव ने कहा कि इस महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है और टेस्टिंग किट के लिए भारत आयात पर काफी निर्भर है। भारत में टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के लिए किट की घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं।

आईसीएमआर के पीआरओ ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, परीक्षण के लिए कीमत तय करना पहले से ही राज्यों पर निर्भर है। कोरोना ब्रेकआउट के शुरुआती चरणों में परीक्षण किट का संकट था, क्योंकि हम आयात पर बहुत अधिक भरोसा करते थे। खरीद के प्रयासों और लागत को देखते हुए आईसीएमआर ने परीक्षण की ऊपरी सीमा 4,500 रुपये करने का सुझाव दिया, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। राज्य अब बातचीत कर सकते हैं और कीमतें नीचे ला सकते हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे भारत ने टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्च र में सुधार किया है और इस दिशा में हुए तमाम कार्यों को देखते हुए परीक्षण कीमतों को संशोधित किए जाने की बात कही गई है। यही वजह है कि अब पहले बताई गई टेस्ट की अधिकतम कीमत लागू नहीं करते हुए इसे कम किए जाने की कवायद शुरू हो गई है।

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