comScore

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, 15 दिनों के अंदर प्रवासी श्रमिकों को घर भेजें

June 19th, 2020 20:01 IST
 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, 15 दिनों के अंदर प्रवासी श्रमिकों को घर भेजें

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, 15 दिनों के अंदर प्रवासी श्रमिकों को घर भेजें

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र से कहा कि वह सभी प्रवासी मजदूरों को तय समयसीमा के अंदर उनके घर भेजे और अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित करे। शीर्ष अदालत ने नौ जून को आदेश दिया था कि प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी हो जानी चाहिए।

कोरोनावायरस संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की पीठ ने नौ जून को केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे 15 दिनों के भीतर सभी प्रवासी कामगारों को उनके मूल स्थानों पर भेज दें।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उनके लिए रोजगार योजनाएं बनाने को भी कहा था। इतना ही नहीं, पीठ ने केंद्र को 24 घंटे के भीतर राज्यों को अतिरिक्त ट्रेनों की सुविधा देने का भी निर्देश दिया था, जिससे प्रवासी श्रमिकों को उनके मूल स्थानों पर वापस भेजा जा सके।

पीठ ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि प्रवासियों को वापस भेजे जाने के लिए किसी भी भुगतान की आवश्यकता न हो। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अदालत का पिछले आदेश का सही भावना के साथ पालन नहीं हो रहा है।

पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को आदेश का पालन करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बात करने को कहा। पीठ ने मामले पर अगली सुनवाई जुलाई में तय की है।

न्यायमूर्ति शाह ने साफ किया है कि तमाम प्रवासी मजदूरों को आदेश के 15 दिनों के भीतर उनके पैतृक गांव भेजे जाने का निर्देश है। न्यायमूर्ति शाह ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि 15 दिनों की अनिवार्यता नहीं है। न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि हाईकोर्ट को सूचित किया जाना चाहिए कि शीर्ष अदालत का आदेश अनिवार्य है।

यानी सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर किया है कि उसका नौ जून का दिया आदेश अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए और सभी प्रवासी मजदूर 15 दिनों के भीतर उनके पैतृक गांव पहुंचाए जाने चाहिए।

मेहता ने कहा कि राज्यों से कहा गया है कि वे प्रवासियों को लाने-ले जाने के लिए गाड़ियों के लिए अपनी मांग प्रस्तुत करें। मेहता ने कहा कि यह कार्य होते ही 24 घंटे के भीतर ट्रेनें प्रदान की जा रही है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पलायन के दौरान मजदूरों पर दर्ज किए गए लॉकडाउन उल्लंघन के मुकदमे वापस लिए जाएं। सभी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन किया जाए और जो मजदूर घर जाना चाहते हैं, उन्हें 15 दिन के अंदर घर भेजा जाए। शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर राज्य सरकारें अतिरिक्त ट्रेन की मांग करती हैं तो केंद्र 24 घंटे के अंदर मांग पूरी करे।

कमेंट करें
GA9Ep
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।