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WorldFoodDay: फूड शेयरिंग को बनाएं अपनी आदत, स्वस्थ्य रहने के लिए फॉलो करें हेल्दी डाइट

WorldFoodDay: फूड शेयरिंग को बनाएं अपनी आदत, स्वस्थ्य रहने के लिए फॉलो करें हेल्दी डाइट

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। दो वक्त की रोटी सभी के लिए बहुत जरुरी होती है, लेकिन ​विश्व की 81 करोड़ आबादी को दो वक्त की रोटी भी ठीक से नहीं मिल पाती। विश्व में व्याप्त इसी भुखमरी की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड फूड डे मनाया जाता है। इसका उदेश्य भुखमरी को जड़ से खत्म करना है। इस खास दिन को सेलिब्रेट करने के लिए हर साल किसी न किसी थीम का आयोजन किया जाता है। इस साल वर्ल्ड फूड डे 'हमारे कार्य, हमारा भविष्य, जीरो हंगर के लिए हेल्दी डायट्स' की थीम पर सेलिब्रेट किया जा रहा है। इस विषय पर संयुक्त राष्ट्रसंघ ने अपनी सलाह में कहा है कि जितनी जरूरत उतना खाएं, आसान जीवनशैली के लिए हेल्दी-डाइट लें और खाना कम से कम बर्बाद हो, इस फॉर्मूले को अपनाएं। आज वर्ल्ड फूड डे पर जानते हैं कि वे कौनसे पदार्थ जिनका सेवन कर आप फिट रह सकते हैं और वे आदतें जिन्हें फॉलो कर आप हंगर को दूर कर सकते हैं। 

हेल्दी डाइट का रखें ध्यान 
हर उम्र के साथ खान पान में बदलाव की जरुरत होती है। बढ़ती उम्र में खान पान में ऐसी चीजें शामिल करना चाहिए, जिनमें फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे खाना आसानी से पचता है और शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल भी मेंटेन रहता है। बढ़ती उम्र में खाने की थाली में फल और सब्जियां शामिल करनी चाहिए। फलों और सब्जियों में फाइबर तो होता ही है, इसमें मिनरल और विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। हरी सब्जियां आयरन का अच्छा स्त्रोत हैं। इन्हें खाने से खून अच्छे से बनता है, हीमोग्लोबिन ठीक रहता है। खाने में विटामिन सी वाले आहार जैसे संतरा, नींबू और स्‍ट्रॉबेरी को भी शामिल करना चाहिए। इस तरह की डाइट से आप खुद को फिट रख सकते हैं। 

फूड शेयरिंग पर करें फोकस
ज्यादातर लोग खाने को व्यर्थ करते हैं। जरुरत से ज्यादा खाना अपनी प्लेट में लेकर उसे फेक देते हैं। ऐसे में घर का बचा खाना फेंकने के बजाए किसी जरुरतमंद को दें। इससे खाना वेस्ट नहीं होगा और साथ ही किसी का पेट भी भरेगा। इस कांसेप्ट से सामाजिक आचार-व्यवहार में भी समरसता आएगी। वर्तमान में कई ऐसे संगठन हैं, जो इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। वे शादी पार्टी या घर का बचा हुआ खाना जरुरतमंद तक पहुंचाते हैं। इससे खाने की बर्बादी तो रुकती ही है। साथ ही किसी जरुरतमंद का पेट भी भरता है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।