India-US Relation: 'हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं' भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों पर दिया बड़ा संदेश

हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों पर दिया बड़ा संदेश
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील पर बातचीत अटकी हुई है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील पर बातचीत अटकी हुई है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साझा जुड़ाव बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि 21वीं सदी का इतिहास इसी क्षेत्र के आधार पर लिखा जा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच साझेदारी यह निर्धारित कर रही है कि यह सदी कैसी होगी।

'21वीं सदी की कहानी के बारे में सोचें'

न्यूज एजेंसी IANS ने अपनी रिपोर्ट में बताया, "भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और एक मजबूत भू-राजनीतिक साझेदार है। अगर आप 21वीं सदी की कहानी और इतिहास के बारे में सोचें, तो यह इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है और अभी इसी वक्त लिखा जा रहा है। एक दिन कोई 21वीं सदी के इतिहास पर किताब लिखेगा। उसमें दुनिया के अन्य क्षेत्रों के बारे में भी एक अध्याय होगा, लेकिन 21वीं सदी कैसी होगी, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, यह इसी बात से तय होगा कि इस क्षेत्र में क्या होता है। हम यह जानते हैं। हम इसे महसूस कर सकते हैं।"

'फ्रीडम 250' कार्यक्रम को किया संबोधित

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर मुंबई में आयोजित 'फ्रीडम 250' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रुबियो ने बताया, "मेरा दृढ़ विश्वास है कि अमेरिका और भारत के बीच के संबंध कई सकारात्मक मायनों में यह तय करेंगे कि 21वीं सदी कैसी होगी। भारत और अमेरिका इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सुपरइंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल मानवता के भले के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, इनके नुकसानों को भी कम किया जाना चाहिए।"

इंडो-पैसिफिक पर क्या कहा?

अमेरिकी विदेश मंत्री का कहना है, "दोनों देश एक ऐसे मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक) की जरूरत पर भी सहमत हैं, जहां कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपना प्रभुत्व न जमा सके। फ्री ट्रेड खुले समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से भारत और अमेरिका के लिए यह एक ऐसे मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर निर्भर है, जिसमें कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपना प्रभुत्व या स्वामित्व होने का दावा न कर सके। इस मुद्दे पर हमारी सोच शत-प्रतिशत एक जैसी है।"

'दो देश हर मुद्दे पर नहीं होते सहमत'

मार्को रुबियो ने आगे कहा, "दुनिया के कोई भी दो देश हर मुद्दे पर पूरी तरह से सहमत नहीं हो सकते हैं। जाहिर है, कुछ बातों पर असहमति भी होगी, लेकिन भारत और अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुख्य मुद्दों पर हमारे दोनों देशों के बीच असाधारण तालमेल है, खासकर इतने बड़े आकार वाले दो देशों के मामले में।"

Created On :   21 Oct 2026 1:43 AM IST

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