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भय्यूजी महाराज को बेटी ने दी मुखाग्नि

June 13th, 2018 19:59 IST
भय्यूजी महाराज को बेटी ने दी मुखाग्नि

हाईलाइट

  • बहुत कोशिश बाद भी जब दूसरी पत्नी और बेटी के बीच खत्म नहीं हुआ विवाद तो टूट गए थे भय्यू जी
  • अप्रत्याशित मौत से विशाल भक्त परिवार में शोक की लहर, एक दूसरे से लिपट पर रो पड़े लोग
  • अंतिम संस्कार आज दस बजे से 2 बजे के बीच इंदौर में, अंतिम दर्शनों को उमड़े लोग

डिजिटल डेस्क, इंदौर। प्रवचनकर्ता भय्यूजी महाराज के अंतिम दर्शनों को पूरे इंदौर नगर के लोग उमड़ पड़े। बुधवार को भमोरी श्मशान घाट पर उनका विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। उनकी बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को गोलीमार कर आत्महत्या कर ली थी। उनकी अप्रत्याशित मौत से उनके विशाल भक्त परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के पहले उनका पार्थिव शरीर आज इंदौर में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय और दूरदराज से आए भक्तों ने उनके अंतिम दर्शन किए। उनका पार्थिव शरीर को देखकर लोग एक दूसरे से लिपट कर रोते-बिलखते देखा जा रहा है। भय्यूजी महाराज की 3 माह की बेटी को भी अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। अंतिम संस्कार में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और पंकजा मुंडे समेत कई हस्तियां उनके अंतिम दर्शन करने पहुंचीं। भय्यू महाराज ने मंगलवार दोपहर अपने स्प्रिंग वैली स्थित घर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली।


आत्महत्या की खबर सुन स्तब्ध हैं शुजालपुर के लोग 
उधर शुजालपुर में भी लोग भय्यूजी महाराज द्वारा आत्महत्या किए जाने से गमजदा हैं। उनके पैतृक घर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हैं। भक्ति, श्रद्धा और समर्पम का ऐसा अद्भुत नजारा कहीं और दिखाई देना मुश्किल है।  भय्यूजी महाराज काफी समय से शुजालपुर में नहीं रहते थे। उनका पैतृक मकान भी काफी समय से सूना पड़ा था, लेकिन उनका अपने गृहनगर से जुड़ाव बिल्कुल कम नहीं हुआ था। वह कहीं रहें, लेकिन उनका शुजालपुर से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। वहां का हर व्यक्ति उनसे व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ा हुआ था। लोगों को मंगलवार को जब भय्यूजी महाराज के असामयिक निधन की जानकारी हुई, पूरा नगर स्तब्ध रह गया। 

शुजालपुर छूटा, पर रिश्ता बना रहा 
लोग यकायक यकीन नहीं पा रहे कि जो व्यक्ति अदम्य जिजीविषा का जीता-जागता प्रतीक था, वह इस तरह अचानक आत्महत्या कैसे कर सकता है। वह व्यक्ति जो जीवन से निराश लोगों के जीवन में उम्मीद जगाता था, वह खुद इस कदर निराशा से कैसे घिर गया कि उसे आत्महत्या करनी पड़ी। भय्यू जी महाराज ने शुजालपुर में अपना बचपन और युवावस्था गुजारी थी। उनका पुश्तैनी मकान वार्ड नंबर दो दिगंबर जैन मंदिर के पास स्थित है। उनके मकान पर सालों से ताला पड़ा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं था कि भय्यूजी का अपने गृहनगर से संबंध ही खत्म हो गया था। वह हमेशा किसी न किसी रूप में यहां से जुड़े रहते थे। पिछले दिनों जब उन्होंने यहां जल संकट की स्थिति गंभीर देखी, तो उन्होंने जलसंरक्षण को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया। स्वयं धन देकर और स्थानीय लोगों को प्रेरित कर उन्होंने अनेक तालाब बनवाए। जिसके बाद यहां पानी का टोटा नहीं रहा। यही नहीं, स्थानीय लोगों को जब भी कोई जरूरत पड़ी वह हमेशा उनके साथ खड़े दिखाई दिए। इस लिए स्थानीय लोगों के मन पर उनके जाने का जख्म बहुत गहरा है। 

जमींदार परिवार से थे भय्यूजी महाराज
24 अप्रैल 1968 को जन्मे 50 वर्षीय भय्यूजी महाराज उर्फ उदय पिता विश्वासराव देशमुख ने प्राथमिक शिक्षा दीप्ति कॉन्वेंट व उच्च शिक्षा जवाहरलाल नेहरू कॉलेज शुजालपुर में प्राप्त की थी। इनके पिता विश्वासराव देशमुख को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक थे। उनका पुश्तैनी गांव अख्त्यारपुर है। उनके पिता अख्त्यारपुर के मालगुजार थे। पिताजी के निधन के बाद भय्यूजी महाराज ने उनकी गांव में समाधि भी बनवाई थी। उनकी माता कुमुदनीदेवी भय्यूजी महाराज के साथ ही इंदौर में रह रही थीं। उनकी दो बहनें रेणुका व अनुराधा हैं, जिनका विवाह हो चुके हैं। भय्यू जी महाराज का पहला विवाह औरंगाबाद (महाराष्ट्र) निवासी माधवी देशमुख से हुआ था। इनकी एक बेटी कुहू (18) है, जो इस समय पुणे में पढ़ रही है। पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अप्रैल 2017 में दूसरा विवाह किया था। उनका जीवन निरंतर बदलाव का गवाह रहा है। वह पहले फैशन डिजाइनर थे। उन्होंने मॉडलिंग भी की थी। बाद में वह आध्यात्म की ओर मुड़ गए। 

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डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने क्वार्टर फाइनल में विश्व की नंबर 2 टीम ऑस्ट्रेलिया को हरा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाकर एक नया इतिहास रच दिया है। 41 सालों के बाद भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुची है। अब जानते है उन महिला खिलाड़ियो के बारे में जिन्होंने टीम को जिताने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।  

रानी रामपाल ( कैप्टन)

रानी रामपाल भारतीय हॉकी टीम की कैप्टन हैं। जिन्हें भारतीय हॉकी टीम की रानी भी कहा जाता है। रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहनी वाली हैं। रानी एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं और उनकी जिन्दगी संघर्ष भरी रही है। रानी के घर में उनके पिता और दो बड़े भाई हैं।सबसे बड़े भाई बढ़ई हैं और दूसरे भाई किसी दुकान पर काम करता हैं। इसके साथ ही रानी के पिता एक तांगा चलाते हैं। बता दें कि रानी ने 14 साल की उम्र में ही अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेल लिया था। और हाल ही में रानी की कप्तानी में भारतीय हॉकी टीम ने फिर कमाल कर दिखाया है।  

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सविता पूनीया
हरियाणा की सविता पूनीया भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर हैं। सोमवार को टोक्यो ओलंपिक में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खड़ी रहीं और भारत को जीत दिलाई। दुनिया की दूसरे नंबर पर आने वाली महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत ने अपना उच्च प्रदर्शन दिखाते हुए पहले क्वार्टर में ऑस्ट्रेलिया को आगे नही बढ़ने दिया और दूसरे क्वार्टर में अच्छा प्रदर्शन करते हुए गोल भी मारा। सविता पूनीया मैच की हीरो रहीं क्योंकि उन्होंने सात पेनल्टी कॉर्नर के बावजूद ऑस्ट्रेलिया का गोल नहीं करने दिया। 

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वंदना कटारिया 
टोक्यो ऑलंपिक में दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए मुकाबले में फॉर्वर्ड खिलाड़ी वंदना कटारिया ने जोरदार परफॉर्मेस दिया और 3 गोल दागकर भारत की जीत को तय किया। वंदना कटारिया पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक मैच में हैट्रिक जमाई और शानदार खेल का प्रदर्शन कर भारतीय महिला हॉकी टीम के क्वालीफाई की उम्मीद को जिंदा रखा। वंदना के साथ नेहा ने भी भारत की जीत के लिए नींव रखी। 

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मोनिका मलिक 
मोनिका मलिक ने 2013 में जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीता और 2013 में ही आयोजित तीसरी एशियन चैम्पियनशिप ट्रॉफी में रजत पदक जीता। 2014 में भोपाल में हुए चौथे सीनियर नेशनल गेम्स में रजत पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला। 2014 में दक्षिण कोरिया में आयोजित 17वें एशियन गेम्स में उन्होंने कास्य पदक जीता। मोनिका ने कहा था कि यह पहली बार है जब भारतीय टीम को ओलंपिक में खेलने का मौका मिला। और अब टीम ने ओलंपिक का अनुभव भी हासिल कर लिया है, जिसका फायदा उन्हें टोक्यो ओलंपिक में मिल सकता है। मोनिका इस ओलंपिक में उसी तजुर्बे का फायदा उठाती नजर आ रही हैं। मोनिका मलिक अर्जेंटीना की प्रसिद्ध खिलाड़ी आइमर को अपनी आदर्श मानती हैं। 

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड की खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस तारा सुतारिया को उनकी एक्टिंग के साथ साथ उनके फैशन सेंस के बारे भी जाना जाता है। तारा हर तरह की ड्रेस में खूब जंचती हैं फिर चाहें वो वेस्टर्न हो या इंडियन। और वह अक्सर अपने लुक को शेयर करती रहती हैं। तारा ने हाल ही में अपने एक नए लुक को शेयर किया है, जिसमें उन्होंने एक ऑरेंज कलर का बहुत ही सुन्दर लहंगा पहना है। लहंगे के साथ तारा ने ब्रोकेड ब्लाउज पहना है और साथ में एलिगेंट दुपट्टा गले में डाला हुआ है। इस लहंगे में तारा बेहद खुबसूरत दिख रही है।

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इस ऑरेंज कलर के रॉयल लुक वाले लहंगे की कीमत 81,900 रुपये है और इसे डिजाइनर ऋतु कुमार की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है।
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तारा सुतारिया के अगर करियर की बार करें तो इन्होंने बॉलीवुड में अभी तक दो फिल्में की हैं। तारा की पहली फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर थी और दूसरी फिल्म थी मरजावां जिसमें तारा अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नजर आई थीं।

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 खबर है कि तारा जल्द ही अपनी नई फिल्म एक विलेन रिटर्न्स और तड़प में नजर आने वाली हैं। बता दें कि फिल्म एक विलेन रिटर्न्स में तारा के साथ जॉन अब्राहम और अर्जुन कपूर दिख सकते हैं। जबकि फिल्म तड़प में तारा के साथ सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी दिख सकते हैं।