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तीस हजारी कांड विशेष : आला पुलिस अफसरों की सुस्ती वकीलों से पिटवाती रही निहत्थे हवलदार-सिपाही!

November 03rd, 2019 14:03 IST
तीस हजारी कांड विशेष : आला पुलिस अफसरों की सुस्ती वकीलों से पिटवाती रही निहत्थे हवलदार-सिपाही!

हाईलाइट

  • तीस हजारी कांड विशेष : आला पुलिस अफसरों की सुस्ती वकीलों से पिटवाती रही निहत्थे हवलदार-सिपाही!

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शनिवार को दिल्ली की तीस हजारी अदालत में हुए झगड़े में कई सनसनीखेज खुलासे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। कुछ तो ऐसे तथ्य हैं जिन पर आसानी से विश्वास करना भी मुश्किल है। सच तो मगर सच है जिसे नकार पाना दिल्ली पुलिस और वकीलों में से किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। तथ्यों पर विश्वास करने-कराने के लिए खून-खराबे वाले इस शर्मनाक घटनाक्रम के वीडियो ही काफी हैं।

आईएएनएस की विशेष पड़ताल और घटनाक्रम के वीडियो (सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज) देखने के बाद यह साफ हो गया है कि, वकील यूं ही बेखौफ होकर पुलिस वालों पर नहीं टूट पड़े थे, बल्कि उन्हें लॉकअप की सुरक्षा में तैनात तमाम निहत्थे हवलदार-सिपाहियों (इनमें से अधिकांश दिल्ली पुलिस तीसरी बटालियन के जवान हैं, जिनकी जिम्मेदारी लॉकअप सुरक्षा और जेलों से अदालत में कैदियों को लाने ले जाने की है) को जमकर पीटने का पूरा-पूरा मौका कथित रुप से दिया गया!

घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज इस बात के गवाह हैं कि जब अपनी पर उतरे वकील लॉकअप को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, तब लॉकअप के भीतर मौजूद थर्ड बटालियन के निहत्थे दारोगा, हवलदार-सिपाही कैसे मार खाते हुए भी, वकीलों से खुद को और लॉकअप के मुख्य द्वार को बचाने की जद्दोजहद से जूझ रहे थे। उन जानलेवा हालातों में भी लॉकअप पर तैनात पुलिस स्टाफ की मजूबरी यह थी कि वे कानूनन किसी भी कैदी को हथकड़ी नहीं लगा सकते थे। मतलब कैदियों को अगर जरा सा भी मौका मिलता तो, वे कभी भी मौके का फायदा उठाकर फरार हो सकते थे।

ऐसे में लॉकअप के बाहर मचे बबाल को काबू करने की जिम्मेदारी सीधे-सीधे स्थानीय थाना पुलिस (सब्जी मंडी) और उत्तरी दिल्ली जिले के पुलिस अधिकारियों की बनती थी। सीसीटीवी के शुरूआती फुटेज में मगर कहीं भी थाना सब्जी मंडी एसएचओ से लेकर सब डिवीजन सब्जी मंडी का सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मोनिका भारद्वाज, एडिशनल डीसीपी हरेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त पुलिस आयुक्त मध्य परिक्षेत्र राजेश खुराना, विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था, उत्तरी परिक्षेत्र) संजय सिंह सहित दिल्ली पुलिस के तमाम जिम्मेदार आला-अफसरान कहीं भी सीसीटीवी फुटेज में पुसिकर्मियों से सिर-फुटव्ववल कर रहे वकीलों से जूझते नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं जब काफी देर की लेट-लतीफी के बाद एडिशनल पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा तो उसे भी कोई आला पुलिस अफसर लीड करता हुआ नहीं दिखाई दिया।

मतलब साफ है कि, लॉकअप इंचार्ज ने जब बबाल का मैसेज दिया तभी तुरंत दिल्ली पुलिस के संबंधित आला पुलिस अफसरों को मौके पर पहुंच कर हालात काबू करवा लेने चाहिए थे। ताकि बात गोली चलने-चलाने तक पहुंचती ही नहीं। न ही लॉकअप की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी बे-वजह वकीलों से जमीन पर पड़े-पड़े लात-घूंसों से मार खाते। हां, उत्तरी दिल्ली जिले के एडिशनल डीसीपी हरेंद्र कुमार सिंह काफी देर बाद ही सही मगर घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर पहुंचते ही वे वकीलों के हमले में जख्मी हो गए। हरेंद्र सिंह खुद को भी बाकी तमाम पुलिसकर्मियों और मौजूद कैदियों को तीस हजारी के लॉकअप में बंद करके सुरक्षित बचा पाए।

जिला डीसीपी मोनिका भारद्वाज इस पूरे बबाल में घटनास्थल पर कहीं भी मौजूद (सीसीटीवी में) दिखाई नहीं दीं। उल्लेखनीय है कि, यही उत्तरी जिला डीसीपी मोनिका भारद्वाज जब पश्चिमी दिल्ली जिले की डीसीपी थीं, तब भी मायापुरी इलाके में की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान कई पुलिस कर्मी जमकर पीटे गए थे। जबकि खुद डीसीपी मोनिका भारद्वाज मौके पर ही कथित रुप से बेहोश होकर गिर पड़ी थीं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।