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अमित शाह बोले- एक तिहाई कश्मीर हमारे साथ नहीं, नेहरू को बताया जिम्मेदार


हाईलाइट

  • लोकसभा ने J&K में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव को पारित कर दिया
  • इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू पर जमकर निशाना साधा
  • शाह ने कहा, नेहरू की वजह से एक तिहाई जम्मू-कश्मीर हमारे साथ नहीं है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव को पारित कर दिया। जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 को भी लोकसभा ने मंजूरी दे दी है। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर जमकर निशाना साधा और कश्मीर की स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार बताया।

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव लोकतांत्रिक, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होंगे जैसे ही चुनाव आयोग तारीखों की घोषणा करेगा। उन्होंने लोकसभा में यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है, यह स्थायी नहीं है। अमित शाह ने कहा, 'एक तिहाई जम्मू-कश्मीर हमारे साथ नहीं है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? जम्मू-कश्मीर के लोगों का विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, उन्होंने बहुत कुछ झेला है और दूसरों की तुलना में अधिक विकास के हकदार हैं।' सदन में नेहरू का नाम लेने पर कांग्रेस ने हंगामा किया।

शाह ने राज्य में 'निष्पक्ष चुनाव कराने में विफल' रहने के लिए भी कांग्रेस पर निशाना साधा और दावा किया कि मोरारजी देसाई और अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में उचित चुनाव हुए थे। कश्मीरियत की अवधारणा के बारे में बात करते हुए, शाह ने कहा कि 'इन्सानियत, जम्हूरियत और कश्मीरीयत की नीति अभी भी राज्य में काम कर रही है। हम कश्मीरियत को खत्म नहीं होने देंगे।'

शाह ने कहा कि आर्टिकल 356 (राष्ट्रपति शासन) 132 बार लगाया गया है, जिसमें से कांग्रेस ने इसे 93 बार लगाया है। शाह ने कहा, 'हमने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कभी नहीं किया है, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा किया।' यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि राज्य विधानसभा भंग होने के बाद से जम्मू और कश्मीर राज्य राष्ट्रपति शासन के अधीन है।

पहली बार केंद्रीय मंत्री ने धर्म के आधार पर देश को विभाजित करने के निर्णय पर सवाल उठाया। शाह ने कहा, 'धर्म के आधार पर देश का विभाजन किसने किया? जम्मू-कश्मीर में लोगों के मन में अविश्वास का बीज किसने डाला? यह कांग्रेस थी जिसने ऐसा किया।

शाह ने कहा, 'पहली बार, लोग महसूस कर रहे हैं कि जम्मू और लद्दाख भी राज्य का हिस्सा हैं। वर्षों से लंबित मुद्दों को पिछले साल देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सुलझाया है।

हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं पर निशाना साधते हुए शाह, जिन्होंने हाल ही में राज्य का दौरा किया था, ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में 919 लोगों की सुरक्षा सरकार द्वारा समीक्षा के बाद वापस ले ली गई क्योंकि उन्हें कोई सुरक्षा खतरा नहीं था।'

पाकिस्तान और आतंकवाद पर
संसद में अपने पहले भाषण में गृहमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक का भी जिक्र किया। शाह ने कहा, भारत ने आत्मरक्षा के लिए ये दोनों ऑपरेशन किए। उन्होंने कहा नरेंद्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है। हम पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद की जड़ को निशाना बनाएंगे।

राज्य में सुरक्षा और सशस्त्र बलों के बारे में बात करते हुए, शाह ने कहा, 'सरकार ने सुरक्षा तंत्र को उन्नत करने के लिए 2307 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हमारी विचारधारा सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश को आतंकवाद मुक्त बनाने की है।'

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