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#GST : राज्याें के नफे-नुकसान से तय होगा आपकी जेब पर पड़ने वाला असर

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 15:35 IST

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#GST : राज्याें के नफे-नुकसान से तय होगा आपकी जेब पर पड़ने वाला असर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. देश में शुक्रवार रात से लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) न केवल कर व्यवस्था में बदलाव लाएगा, बल्कि इससे देश के संघीय ढांचे में भी बड़ा बदलाव आएगा। टैक्स सुधार प्रणाली लागू होने के बाद से ही चर्चा के विषय यह है कि GST के बाद आपके व्यापार में कितना असर होगा। जीएसटी के बाद राज्य कई तरह के टैक्स लगाने की अपना सबसे महत्वपूर्ण ताकत का अधिकांश हिस्सा त्यागने जा रहे हैं। लेकिन बावजूद इसके, ये आपका राज्य ही तय करेगा कि आप पर जीएसटी का कितना असर होगा।

इसे और आसानी से समझें

हर राज्य की आमदनी और खपत में अंतर है। रेवेन्यू न्यूट्रल रेट्स का आकलन करनेवाला एक कैलिब्रेटेड मॉडल के तहत सामने आया है कि अगर इफेक्टिव जीएसटी रेट 20.1 प्रतिशत है तो तमिलनाडु सरकार के रेवेन्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन, इससे कम रेट होने पर उसका राजस्व घट जाएगा। अगर ये दर 20.1 प्रतिशत से ज्यादा है तो जीएसटी के बाद सभी राज्यों का राजस्व बढ़ जाएगा। लेकिन रिसर्च बताती हैं कि बड़े राजस्व वाले राज्यों में नागरिकों का जीवन स्तर ऊंचा हो, इसकी कोई गारंटी नहीं।

जीएसटी का एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि राज्य अपने स्तर से टैक्स की दरों में बदलाव नहीं कर सकते। ये काम सिर्फ जीएसटी काउंसिल ही कर सकता है, जिसमें केंद्र के साथ-साथ हर राज्य का प्रतिनिधित्व है। इसका जबर्दस्त फायदा होगा। लेकिन फिलहाल ये साफ नहीं है कि जीएसटी में राज्य सरकारों का राजस्व बढ़ेगा या घटेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका राजस्व पर किसी तरह का असर नहीं होगा। लेकिन, सवाल ये है कि ये स्थिरता किसके लिए होगी?

अब तक अलग-अलग राज्यों में तरह-तरह के जटिल टैक्स लागू थे जो कारोबार स्थापित करने और इसका विस्तार करने की राह में रोड़े का काम करते थे। हालांकि, इस संबंध में ये भी सही है कि जीएसटी का सुचारू संचालन इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

समस्याएं भी हैं

दरअसल, अप्रत्यक्ष कर के जटिल ढांचे को बदलने से कारोबारियों को पूरे देश में व्यवसाय करना आसान हो जाएगा। इससे निवेश बढ़ेगा और फिर इससे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। अर्थव्यवस्था बढ़ने से नागरिकों का के क्लायणकारी कार्यों पर ज्यादा खर्च हो पाएगा। ये जीएसटी को लागू करने के पीछे सबसे मजबूत तर्क है।

सिर्फ एक जीएसटी रेट की जगह चार दरें तय हुई हैं। कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं पर अलग-अलग दरें लागू होंगी। इससे कर वसूली में सहूलियत की जो आकांक्षा थी, उसे चोट पहुंचेगा। साथ ही, कोई अगर किसी राज्य में बिजनेस करना चाह रहा है, तो हरेक राज्य के साथ-साथ सेंट्रल टैक्स अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन की जरूरतों से उसके लिए जटिलताएं और लागत बढ़ेंगी। जबकि जीएसटी से उम्मीद की जा रही है कि टैक्स कलेक्शन पर सरकारी खर्चे में कमी आएगी।

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