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RBI ने ब्याज दरों में की कटौती, होम लोन में मिल सकता है लाभ

February 08th, 2019 14:38 IST

हाईलाइट

  • रेपो रेट 6.5 से घटाकर 6.25 प्रतिशत
  • रिवर्स रेपो रेट भी घटकर हुआ 6.00 प्रतिशत
  • आमआदमी को होमलेान में मिल सकती है बढ़ी राहत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले का इंतजार खत्म चुका है। आरबीआई ने गुरुवार को ब्याज दरों में कटौती का एलान किया है। जिसमें रेपो रेट 6.5 से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है। वहीं रिवर्स रेपो रेट भी घटाकर 6.00 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अब होम लोन के ब्याज दरों में कटौती होगी। जानकारी के अनुसार मौद्रिक नीति समिति के चार सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में जबकि दो सदस्य रेपो रेट में कटौती के पक्ष में नहीं थे। 

आरबीआई ने मार्च तिमाही के लिए प्रमुख मुद्रास्फीति अनुमान घटाकर 2.8 प्रतिशत किया है। अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए यह अनुमान 3.2 से 3.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए 3.9 प्रतिशत किया है। समिति के दो सदस्यों चेतन घाटे और विरल आचार्य ने नीतिगत दर यथावत रखने के पक्ष में मत दिया। रिजर्व बैंक के रुख को बदलकर तटस्थ करने का फैसला आम सहमति से किया गया है। आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह अनुमान 7.2 प्रतिशत रखा गया है।

क्या है  रेपो रेट

रेपो रेट वह दर है जिसपर देश का कोई बैंक रिजर्व बैंक से कम अवधि का कर्ज लेता है। रेपो रेट से देश में ब्याज दरें निर्धारित की जाती है जिसपर कारोबारी और आम बैंक उपभोक्ता को बैंक से लिए गए कर्ज अथवा बैंक में जमापूंजी पर ब्याज मिलता है। वहीं कैश रिजर्व रेशियो किसी बैंक के पास मौजूद कुल मुद्रा का वह हिस्सा है जो केन्द्रीय बैंक के अधीन है। 

जानकारों की मानें तो इस कटौती के बाद सभी तरह लोन सस्ते हो जाएंगे। बता दें कि रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। बैंकों को सस्ता कर्ज मिलेगा तो वो ग्राहकों के लिए भी ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं। गौरतलब है कि आरबीआई ने पिछली तीन समीक्षा बैठकों में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि, उससे पहले दो बार रेपो रेट में 0.25-0.25% का इजाफा किया गया था। मौजूदा रेपो रेट 6.50% था।

बता दें ​कि RBI के नए गवर्नर शक्तिकांत दास के कार्यकाल की यह पहली समीक्षा बैठक थी। दास ने 12 दिसंबर को RBI की कमान संभाली है। इससे पहले दिसंबर में उर्जित पटेल की अगुवाई में अंतिम मौद्रिक बैठक हुई थी। जिसमें केंद्रीय बैंक ने बेंचमार्क ब्याज दर यानी रेपो रेट 6.5 फीसदी पर स्थिर रखी थी और रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी पर कोई बदलाव नहीं किया गया था। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के 3.8 प्रतिशत के अनुमान से कम 2.6 प्रतिशत रही। जबकि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में 7.01 लाख करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2018- 19 में राजकोषीय घाटा 6.24 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। सरकारी आकड़ों के अनुसार रेवेन्‍यू वसूली की रफ्तार कम होने से घाटे का आंकड़ा बढ़ गया है।    
 

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