Stan Wawrinka Retirement: दिग्गज स्टेन वावरिंका ने टेनिस को कहा अलविदा, शानदार करियर में तीन ग्रैंड स्लैम और ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता

दिग्गज स्टेन वावरिंका ने टेनिस को कहा अलविदा, शानदार करियर में तीन ग्रैंड स्लैम और ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता
स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी स्टेन वावरिंका ने 41 साल की उम्र में प्रोफेशनल टेनिस से संन्यास ले लिया है। उन्होंने अपने घरेलू टूर्नामेंट स्विस इंडोर्स बेसल में चेक रिपब्लिक के जिरी लेहेका के खिलाफ हार के बाद खेल को अलविदा कहा।

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी स्टेन वावरिंका ने 41 साल की उम्र में प्रोफेशनल टेनिस से संन्यास ले लिया है। उन्होंने अपने घरेलू टूर्नामेंट स्विस इंडोर्स बेसल में चेक रिपब्लिक के जिरी लेहेका के खिलाफ हार के बाद खेल को अलविदा कहा।

वावरिंका अपने शानदार वन-हैंडेड बैकहैंड के लिए दुनिया भर में मशहूर रहे। उन्होंने अपने करियर में तीन ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीते। इसके अलावा उनके नाम ओलंपिक गोल्ड और डेविस कप की ट्रॉफी भी है। उन्होंने टूर लेवल पर कुल 590 मुकाबले जीते और 16 खिताब अपने नाम किए।

दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ियों को हराकर जीते तीनों ग्रैंड स्लैम

वावरिंका की सबसे खास उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपने तीनों ग्रैंड स्लैम खिताब उस समय के दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ियों को हराकर जीते। 2014 में उन्होंने राफेल नडाल को मात देकर ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब हासिल किया। इसके अगले साल 2015 में नोवाक जोकोविच को हराकर फ्रेंच ओपन जीता। 2016 में भी उन्होंने जोकोविच को ही शिकस्त देकर यूएस ओपन की ट्रॉफी अपने नाम की।

वावरिंका उस दौर में खेले, जब टेनिस की दुनिया में रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच का दबदबा था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

2014 में उन्होंने मोंटे-कार्लो में अपना एकमात्र एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब जीता था। फाइनल में उन्होंने अपने हमवतन और टेनिस के दिग्गज रोजर फेडरर को हराया था।

फेडरर के साथ जीता ओलंपिक गोल्ड

वावरिंका ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में रोजर फेडरर के साथ पुरुष डबल्स में जोड़ी बनाई थी। दोनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्विट्जरलैंड के लिए गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद फेडरर और वावरिंका की जोड़ी ने 2014 में स्विट्जरलैंड को उसका पहला डेविस कप खिताब भी दिलाया।

अपना सौ फीसदी देने की कोशिश की

संन्यास के फैसले पर वावरिंका ने कहा कि पिछले 20 से ज्यादा वर्षों में उन्होंने एक खिलाड़ी के तौर पर हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य हमेशा पूरी मेहनत से खेलना, आखिरी तक लड़ना और अपने प्रदर्शन को लेकर कोई पछतावा न रखना रहा। उन्होंने अपने, विरोधियों, टूर्नामेंट और फैंस के प्रति सम्मान को भी अपने करियर का अहम हिस्सा बताया।

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