बेटी बेमिसाल पहली महिला फाइटर पायलट, हवा से करती हैं बातें
नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। कहते हैं न, सपनों की कोई बंदिश नहीं होती। बस हिम्मत चाहिए और उड़ान भरने की चाहत। यही कहानी है बिहार की बेटी भावना कंठ की, जो भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलटों में से एक हैं। बचपन में आसमान में उड़ते जहाजों को देखकर जो आंखें चमक उठती थीं, वही आंखें आज देश की रक्षा में आकाश को चीरती हैं।
बिहार में जन्मी भावना पढ़ाई में तेज थीं और सपनों में उससे भी तेज। पिता और परिवारिक माहौल ने उन्हें सिखाया कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। दसवीं में 90 प्रतिशत से ज़्यादा अंक लाकर उन्होंने 'मेधा पुरस्कार' हासिल किया और तभी से उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ गया।
इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में जाने की इच्छा जताई, लेकिन उस समय लड़कियों के लिए रास्ता बंद था। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई की। फिर भारतीय वायुसेना की परीक्षा में बैठीं और पास भी कर लीं।
2016 ने भारतीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। उस साल तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने महिलाओं पर लगे फाइटर स्ट्रीम का प्रतिबंध हटाया और इसी के साथ आसमान का दरवाजा भी भावना के लिए खुल गया। इसके बाद भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह तीनों पहली महिला फाइटर पायलटों के रूप में भारत का गर्व बन गईं।
लेकिन, भावना ने असली इतिहास तो 16 मार्च 2018 को रचा, जब भावना ने मिग-21 'बाइसन' की अपनी पहली सोलो फ्लाइट उड़ाई। सोचिए जरा, हजारों फीट ऊपर, एक तेज रफ्तार लड़ाकू विमान और उसे अकेले उड़ाती एक भारतीय बेटी। वह पल सिर्फ भावना का नहीं था, वह हर उस मां-बाप के सपनों को सच करने वाला पल था, जो अपनी बेटियों को ऊंची उड़ान भरते देखना चाहते हैं।
मिग-21 वैसे भी भारतीय वायुसेना की विरासत माना जाता है। इसे उड़ाने के लिए बहुत ट्रेनिंग और हिम्मत का काम है और भावना ने ये करके दिखाया। उनके इस साहस ने साबित कर दिया कि अगर मौका मिले तो बेटियां हर उस जगह खड़ी हो सकती हैं, जहां अब तक सिर्फ पुरुष ही खड़े होते आए थे।
उनकी मेहनत और हिम्मत को सलाम करते हुए 9 मार्च 2020 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया। यह सम्मान सिर्फ भावना की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि देश की लाखों लड़कियों के लिए संदेश था कि अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी किया जा सकता है।
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Created On :   30 Nov 2025 9:19 PM IST












