14वीं जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सीआईडी ने 10 और आरोपियों के खिलाफ दाखिल की पहली पूरक चार्जशीट

रांची, 2 नवंबर (आईएएनएस)। 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में धांधली और अनियमितता के मामलों की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने सोमवार को विशेष अदालत में पहली पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार समेत कुल 10 आरोपियों को नामजद किया गया है। इन सभी को इसी साल अगस्त महीने में अलग-अलग तारीखों पर गिरफ्तार किया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस बहुचर्चित मामले में शेष बचे 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ आगामी दिसंबर माह में एक और पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। सीआईडी की विस्तृत जांच में परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर भारी रकम वसूलने, सक्रिय बिचौलियों के एक बड़े नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के कई सनसनीखेज पहलू उजागर हुए हैं। जांच एजेंसी के हाथ ऐसे पुख्ता डिजिटल और भौतिक साक्ष्य लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभ्यर्थियों से केवल नकद ही नहीं, बल्कि आरटीजीएस, यूपीआई और हवाला के अवैध माध्यमों से भी करोड़ों रुपये वसूले गए थे।
आरोपियों के बैंक खातों, पासबुक, केवाईसी दस्तावेजों और मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का बारीकी से विश्लेषण कर वित्तीय लेन-देन का ब्योरा चार्जशीट में दर्ज है। दूसरी पूरक चार्जशीट में जिन 10 आरोपियों के नाम शामिल हैं, उनमें बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार और उमेश कुमार प्रमुख हैं, जिन्हें 5 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 6 अगस्त को उमाकांत उरांव, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रक्षक सिंह और रौशन केरकेट्टा की गिरफ्तारी हुई थी। अरुण कुमार की गिरफ्तारी 13 अगस्त और ब्रज कुमार राम की गिरफ्तारी 17 अगस्त को हुई थी। ये सभी आरोपी गिरफ्तारी के बाद से लगातार न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
अनुसंधान के दौरान यह बात सामने आई है कि गिरोह के सदस्यों द्वारा अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और सुरक्षा के तौर पर हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक तक गिरवी रखवाए जाते थे। सीआईडी को मुख्य आरोपी बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की एक गुप्त सूची बरामद हुई थी, जिसकी जांच करने पर पता चला कि उनमें से 11 अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में सफल भी रहे थे।
एजेंसी इस सूची के आधार पर सफल अभ्यर्थियों और इन दलालों के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल कर रही है। इसी क्रम में, मामले के एक अन्य आरोपी अभय तिवारी के ठिकानों पर छापेमारी कर सीआईडी ने 5.50 लाख रुपये नकद, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किया था। जांच में यह आशंका भी गहरी हुई है कि अवैध तरीके से जुटाई गई इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा कुछ शेल कंपनियों के बैंक खातों में निवेश किया गया था।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल भ्रष्टाचार के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था। सीआईडी की इस व्यापक जांच का दायरा सिर्फ छोटे बिचौलियों और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी परीक्षा से जुड़े मास्टरमाइंड्स, आयोग के संदिग्ध अधिकारियों और परीक्षा संचालन एजेंसी के बीच के आर्थिक संबंधों की भी तह तक जाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि इस पूरे मामले में अब तक कुल 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पूर्व में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खिंग्याते समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, और अब 10 नए आरोपियों के खिलाफ दूसरी पूरक चार्जशीट दायर की गई है। शेष 12 आरोपियों के विरुद्ध अनुसंधान पूरा होते ही दिसंबर तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
--आईएएनएस
एसएनसी/पीएम
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