1984 के दंगा पीड़ितों को सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने किया याद, परिवारों के लिए की रोजगार की मांग

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों की याद में दिल्ली के तिलक नगर स्थित शहीद गंज गुरुद्वारा में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक रोजगार देने की मांग की।
सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि एक नवंबर 1984 का दिन बेहद दुखदायी था। उस दिन हजारों निर्दोष सिखों का नरसंहार किया गया। लोगों के गले में टायर डालकर उन्हें जिंदा जला दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके अपने परिवार के चार लोगों को जिंदा जला दिया गया था।
साहनी ने कहा कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश थी। रातों-रात सिख समुदाय के हर घर को चिन्हित किया गया था। किसी को बेवकूफ बनाना आसान है, लेकिन सच्चाई यह है कि सूचियां पहले से तैयार थीं।
उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर सिख घर को मार्क किया गया था। अगर एक घर सिख का था और उसके बाद तीन घर हिंदू परिवारों के थे, फिर अगला घर सिख का था, तो दंगाइयों को यह सब पता था। कई घरों में फर्स्ट फ्लोर पर सिख परिवार रहते थे, उसकी भी जानकारी उनके पास थी। दूसरी बात, एक जैसा सफेद पाउडर फेंका जाता था, जिससे आग लग जाती थी। एक जैसी लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया गया। आज तक इसकी कोई जांच नहीं हुई कि यह पाउडर किसने बनाया, कब बनाया और कब बांटा गया।
सांसद ने सवाल उठाया कि 31 अक्टूबर की रात को ही रॉड कैसे बंट गईं, पाउडर कैसे आ गया और जेलों से अपराधियों को कैसे छोड़ दिया गया। यह एक सुनियोजित कत्लेआम था। इस घटना को 42 साल बीत चुके हैं। आज पीड़ित परिवारों की दूसरी और कई की तीसरी पीढ़ी सामने खड़ी है। जवान लोग चले गए। हर साल रैलियां निकलती हैं, शोक मार्च होते हैं, टीवी पर लोग बोलते हैं, राजनीतिक बयानबाजी होती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
शहीदगंज गुरुद्वारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां एक ही कॉलोनी के कितने लोग शहीद हुए। उनका क्या हुआ? कोई उनकी सुध नहीं ले रहा है। उन्हें फ्लैट तो दिए गए, लेकिन उसकी कीमत 27 हजार रुपए रख दी गई। पीड़ितों ने तीन-तीन हजार रुपए जमा किए, लेकिन अब उस पर लाखों रुपए का ब्याज चढ़ा दिया गया है और आज तक फ्लैट उनके नाम पर ट्रांसफर नहीं हुए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि इसका जिम्मेदार कौन है? 15 साल तक कांग्रेस की सरकार रही, फिर आम आदमी पार्टी की सरकार रही। पीड़ित परिवार पत्र लिख-लिखकर थक गए। उन्होंने सरकारों को लिखा कि फ्लैट इन पीड़ितों के नाम किए जाएं और 27 हजार रुपए की वसूली न की जाए, लेकिन आज तक फ्लैट उनके नाम नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि 2013 तक बिजली के बिल माफ हुए थे, उसके बाद गरीब पीड़ितों से बिल वसूला जा रहा है। उनसे वादा किया गया था कि पुराने बिजली के बिल माफ होंगे और आगे से 600 यूनिट बिजली फ्री मिलेगी। लेकिन आज पुलिस आ जाती है और बिल वसूलती है। इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तीसरी मांग नौकरियों को लेकर थी। उस समय की सरकारों ने, चाहे कांग्रेस रही हो या आम आदमी पार्टी, वादा किया था कि पीड़ितों के बच्चों को नौकरी दी जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि केवल 47 या 48 बच्चों को ही नौकरी मिली। जब 2,600 से अधिक परिवारों की लिस्ट बनी थी, तो नौकरियां कहां हैं?
उन्होंने कहा कि 15 साल कांग्रेस सत्ता में रही, इसके बाद आम आदमी पार्टी सत्ता में रही, उन्होंने क्या किया? वोटों के लिए जरूर यहां आए, लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। 1984 के बाद 90 के दशक में जो नौकरियां दी गईं, वे भी चतुर्थ श्रेणी की थीं। अब केंद्र में हमारी सरकार है और उन्होंने एलजी से भी बात की है। उन्होंने एलजी को सारी बातें लिखित में दी हैं। इन पीड़ितों के साथ न्याय होना चाहिए। अगर न्याय नहीं हुआ तो वे खुद इन पीड़ितों के साथ धरने और भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :  
