50-60 के दशक में हिंदी सिनेमा पर छाईं शकीला, 'बाबूजी धीरे चलना' से मिली खास पहचान
मुंबई, 19 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा के 1950 और 60 के दशक में कई अभिनेत्रियों ने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज किया। इन्हीं में एक नाम शकीला का था। 'आर पार', 'सीआईडी' और 'चाइना टाउन' जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाली शकीला का फिल्मी सफर लगभग डेढ़ दशक का रहा। वह 50 से अधिक फिल्मों में नजर आईं और उस दौर के कई यादगार गीत उन पर फिल्माए गए।
शकीला के जन्म के वर्ष को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अंतर मिलता है। जानकारी के मुताबिक, उनका वास्तविक नाम बादशाह जहां था और उनका जन्म 1 जनवरी 1936 को मध्य पूर्व में हुआ था। शकीला का शुरुआती जीवन आसान नहीं रहा। उनके परिवार की जड़ें अफगानिस्तान और ईरान के शाही परिवारों से जुड़ी बताई जाती हैं। बचपन में परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजरा और शकीला अपनी बहन नूर और नसरीन के साथ मुंबई पहुंचीं। बाद में उनकी बुआ फिरोजा बेगम ने तीनों की परवरिश की। फिल्मों से शकीला का परिचय उनकी बुआ के जरिए हुआ, जिन्हें सिनेमा देखने का काफी शौक था।
परिवार का संबंध फिल्मकार एआर कारदार और महबूब खान से भी था। कारदार ने शकीला को फिल्म 'दास्तान' में काम करने का मौका दिया। इसी दौर में उन्होंने बादशाह जहां की जगह शकीला नाम से फिल्मों में काम करना शुरू किया। 'दुनिया' उनकी शुरुआती रिलीज फिल्मों में शामिल रही। शुरुआत में 'गुमाश्ता', 'सिंदबाद द सेलर', 'आगोश', 'अरमान' और 'शहंशाह' जैसी फिल्मों में शकीला दिखाई दीं।
इसके बाद उन्हें प्रमुख भूमिकाएं मिलने लगीं और धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। शकीला के करियर में गुरु दत्त की 'आर पार' (1954) बेहद महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। फिल्म की सफलता के साथ शकीला को भी व्यापक पहचान मिली। इसके बाद वह 1956 की चर्चित फिल्म 'सीआईडी' में नजर आईं। इसमें देव आनंद और वहीदा रहमान जैसे कलाकार भी थे।
शकीला की अन्य चर्चित फिल्मों में 'हातिम ताई', 'पोस्ट बॉक्स 999', 'श्रीमान सत्यवादी' और 'चाइना टाउन' शामिल हैं। साल 1962 में आई 'चाइना टाउन' में उन्होंने शम्मी कपूर के साथ काम किया। शकीला को केवल फिल्मों ही नहीं, बल्कि उन पर फिल्माए गए सदाबहार गानों के लिए भी याद किया जाता है।
'बाबूजी धीरे चलना', 'नींद न मुझको आए' और 'लेके पहला पहला प्यार' जैसे गीतों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। 'चाइना टाउन' से जुड़ा 'बार बार देखो' भी उनके चर्चित गीतों में गिना जाता है। करीब 14 साल के फिल्मी करियर में शकीला ने 50 से अधिक फिल्मों में काम किया। मुख्यधारा की फिल्मों के अलावा उन्होंने फैंटेसी और कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्मों में भी अभिनय किया। 'हातिम ताई' जैसी फिल्मों ने इस शैली में भी उन्हें पहचान दिलाई। उनकी खासियत यह रही कि वह गुरु दत्त और देव आनंद से लेकर शम्मी कपूर जैसे उस दौर के बड़े सितारों के साथ पर्दे पर दिखाई दीं। 1950 के दशक के मध्य से लेकर 1960 के दशक की शुरुआत तक उनका करियर सक्रिय रहा।
करियर के शीर्ष दौर के बाद शकीला ने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। शादी के बाद वह अपने पति के साथ ब्रिटेन चली गईं। उनकी एक बेटी मीनाज थीं, जिनकी 1991 में मृत्यु हो गई थी। बाद के वर्षों में शकीला वापस मुंबई आ गई थीं और सार्वजनिक जीवन में उनकी मौजूदगी काफी कम हो गई थी। शकीला का अभिनेत्री नूर से पारिवारिक संबंध भी था।
नूर की शादी मशहूर अभिनेता और कॉमेडियन जॉनी वॉकर से हुई थी। इस रिश्ते से जॉनी वॉकर शकीला के बहनोई थे। शकीला का 20 सितंबर 2017 को मुंबई में निधन हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनके निधन के साथ हिंदी फिल्मों के उस दौर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया, जब गीत-संगीत, अभिनय और कलाकारों की स्क्रीन मौजूदगी फिल्मों की लोकप्रियता में बड़ी भूमिका निभाती थी।
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Created On :   19 Sept 2026 11:52 PM IST












