ग्रीन एनर्जी को बड़ी उड़ान 54 हजार करोड़ की ऊर्जा गलियारा-3 योजना मंजूर
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने और 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाने के लिए पीएम-धारा (पीएम-विकसित सामंजस्यपूर्ण और त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा पहुंच) योजना को मंजूरी दी है।
इस संबंध में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा, "आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीईसी-3 योजना को मंजूरी दी है, यह ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-3 योजना है जिसका परिव्यय लगभग 54,000 करोड़ रुपए है और यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य सरकारों को राज्यों के भीतर आरई क्षेत्रों से उनके लोड सेंटर तक लगभग 135 गीगावाट आरई पावर की निकासी के लिए सहायता प्रदान की जाए।"
इस योजना के तहत ग्रिड लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर या नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर या जेनरेटर के छोर पर 50 गीगावाट-घंटा की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की तैनाती का भी प्रावधान है।
बीईएसएस क्षमता का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमितता, ट्रांसमिशन भीड़ और पीक-आवर कटौती से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना है, साथ ही गैर-सौर घंटों के दौरान बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करना है। इस योजना से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर बेहतर ग्रिड एकीकरण और बिजली निकासी में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह योजना वित्त वर्ष 2032-33 तक लागू करने के लिए लक्षित है, जिसकी कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपए है। इसमें से 1,36,378 करोड़ रुपए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-थर्ड के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए निर्धारित किया गया है, जबकि 50 गीगावाट-घंटा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए 50,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
इस योजना में कुल 54,082 करोड़ रुपए की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। केंद्रीय वित्तीय सहायता से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे बिजली की लागत कम रखने में मदद मिलेगी और अंततः बिजली उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम घटक के तहत सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से लागू किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड उन्नयन और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण कार्य लागत प्लस आधार (सीपीबी) पर किए जाएंगे।
राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटीज समग्र कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगी। ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेंटेन (बीओओएम) मॉडल के माध्यम से टीबीसीबी तंत्र के तहत परियोजनाओं में भाग लेंगे।
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Created On :   30 Sept 2026 11:59 PM IST












