अनंत चतुर्दशी पर क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला अनंत सूत्र? जानें धार्मिक महत्व

अनंत चतुर्दशी पर क्यों बांधा जाता है 14 गांठों वाला अनंत सूत्र? जानें धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और अनंत सूत्र धारण कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और अनंत सूत्र धारण कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ गणेश उत्सव का भी समापन होगा। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणपति उत्सव के अंतिम दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अनंत चतुर्दशी व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद अनंत देव की पूजा और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। पूजा के समय 14 गांठ वाला अनंत सूत्र भगवान विष्णु को अर्पित करने के बाद श्रद्धालु इसे अपने हाथ में धारण करते हैं। पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती की जाती है और प्रसाद का वितरण किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। इस सूत्र में 14 गांठें होती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। इसे भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु अनंत सूत्र धारण कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी एक प्रमुख धार्मिक कथा पांडवों से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, जब पांडव द्यूत क्रीड़ा में अपना राज-पाट हारकर वनवास के दौरान कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी।

कहा जाता है कि युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ विधि-विधान से अनंत देव की पूजा की और अनंत सूत्र धारण किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद पांडवों के जीवन में आए संकट दूर हुए और उन्हें कष्टों से मुक्ति मिली।

अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश भक्तों के लिए भी खास होता है। इसी दिन 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन होता है। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भक्ति भाव के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। विसर्जन के दौरान गणपति बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की जाती है।

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Created On :   22 Sept 2026 11:32 PM IST

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