ऑस्ट्रेलिया में आव्रजन-विरोधी मार्च, राजनीतिक हलचल बढ़ी

ऑस्ट्रेलिया में आव्रजन-विरोधी मार्च, राजनीतिक हलचल बढ़ी
ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में आव्रजन (इमिग्रेशन) का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। देश के प्रमुख शहरों में रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटी भीड़ ने बड़े पैमाने पर प्रवासन का विरोध किया। आयोजकों ने दावा किया कि पिछले साल से चल रहे इन प्रदर्शनों ने देश में आव्रजन-विरोधी राजनीति को नई ऊर्जा दी है और इसका सीधा फायदा दक्षिणपंथी 'वन नेशन' को मिला है।

सिडनी, 30 अगस्त (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में आव्रजन (इमिग्रेशन) का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। देश के प्रमुख शहरों में रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटी भीड़ ने बड़े पैमाने पर प्रवासन का विरोध किया। आयोजकों ने दावा किया कि पिछले साल से चल रहे इन प्रदर्शनों ने देश में आव्रजन-विरोधी राजनीति को नई ऊर्जा दी है और इसका सीधा फायदा दक्षिणपंथी 'वन नेशन' को मिला है।

सिडनी के बेलमोर पार्क में आयोजित ‘फ्री स्पीच’ रैली में 300 से अधिक लोग जुटे। किसी संभावित तनाव को देखते हुए 70 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इनमें दंगा नियंत्रण दस्ते के जवान और घुड़सवार पुलिसकर्मी भी शामिल थे। रैली के विरोध में हाइड पार्क में काउंटर-प्रोटेस्ट भी आयोजित किया गया।

राष्ट्रवादी समूह 'रिवाइव ऑस्ट्रेलिया' के संस्थापक ब्रायन मार्लो ने रैली का नेतृत्व किया। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2025 में शुरू हुए ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ आंदोलन ने लोगों को आव्रजन और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर लामबंद किया।

मार्लो ने 'वन नेशन' के हालिया चुनावी प्रदर्शन को इसी राजनीतिक माहौल से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी उपचुनावों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के सीक्रेट उपचुनाव में 'वन नेशन' की जीत का भी जिक्र किया।

हालांकि, यहां एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाई देता है। रैली में 'वन नेशन' समर्थक मौजूद थे और कुछ लोगों ने पार्टी की टी-शर्ट भी पहन रखी थी, लेकिन आयोजकों के सोशल मीडिया मंचों पर हाल के दिनों में वन नेशन की नीतियों की आलोचना भी हुई है।

सबसे बड़ा मतभेद प्रवासन की संख्या को लेकर है। वन नेशन की ओर से सालाना शुद्ध प्रवासन के लिए 1.30 लाख का लक्ष्य स्वीकार करने के संकेत दिए गए हैं, जबकि रैली में शामिल कई लोग इससे कहीं अधिक सख्त रुख की मांग कर रहे थे। भीड़ ने ‘रीमाइग्रेशन’ और बड़े पैमाने पर प्रवासन खत्म करने जैसे नारों का समर्थन किया।

आव्रजन अब केवल आर्थिक नीति का विषय नहीं रह गया है। यह रोजगार, आवास, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक सेवाओं और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े सवालों के साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

'वन नेशन' का बढ़ता समर्थन इसी असंतोष को राजनीतिक रूप देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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Created On :   30 Aug 2026 1:54 PM IST

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