अयोध्या के प्राचीन कुंडों पर अतिक्रमण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, एक हफ्ते में खाली कराने का आदेश

अयोध्या के प्राचीन कुंडों पर अतिक्रमण का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, एक हफ्ते में खाली कराने का आदेश
अयोध्या में प्राचीन कुंडों पर अतिक्रमण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है। यह मामला सुमित्रा कुंड और कौशल्या कुंड से जुड़ा हुआ है, जहां स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को एक हफ्ते के भीतर अतिक्रमण हटाने और कुंडों को संरक्षित करने का आदेश दिया है।

अयोध्या, 22 मई (आईएएनएस)। अयोध्या में प्राचीन कुंडों पर अतिक्रमण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंच गया है। यह मामला सुमित्रा कुंड और कौशल्या कुंड से जुड़ा हुआ है, जहां स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को एक हफ्ते के भीतर अतिक्रमण हटाने और कुंडों को संरक्षित करने का आदेश दिया है।

सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत एवं हिंदू सुरक्षा सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत राजू दास द्वारा उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका दायर की गई है। उक्त याचिका में अयोध्या सदर तहसील के अंतर्गत बाग बिजैसी में स्थित प्राचीन एवं पौराणिक माता कौशल्या कुंड तथा माता सुमित्रा कुंड के संरक्षण एवं कुंड पर वाले सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने की मांग की गई थी।

राजू दास ने बताया कि लंबे समय से इन प्राचीन कुंडों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भूमाफिया ने कुंड के चारों तरफ कब्जा कर लिया और उसकी मूल पहचान तक खत्म करने की कोशिश की। उनका कहना है कि प्रशासन को पहले भी इसकी शिकायत दी गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर किसी ने भी इन कुंडों की जमीन पर अतिक्रमण किया है तो उसे तत्काल हटाया जाए। साथ ही प्रशासन को यह भी कहा गया है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को सुरक्षित किया जाए ताकि उनकी पहचान और महत्व बना रहे।

राजू दास के मुताबिक, याचिका में बताया गया कि विगत लगभग चार दशकों से इन दोनों पौराणिक कुंडों तक पहुंचने के लिए मुख्य सार्वजनिक मार्ग आबादी से होकर संचालित होता रहा है। वर्तमान में आबादी के दक्षिणी दिशा पर दो पानी टंकी एक साथ निर्मित किए जाने के कारण कमी भूमि पूर्ति के लिए आबादी से निर्गत कुण्ड रास्ता अधिग्रहीत हो रहा है, जबकि दोनों टंकी अलग-अलग वार्डों में स्वीकृत थीं। इसी के चलते आसपास की जमीन पर कब्जे की शिकायतें बढ़ीं। उनका कहना है कि धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र घेर लिया गया और कुंडों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया।

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Created On :   22 May 2026 11:55 PM IST

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