बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 3 और मासूमों ने गंवाई जान
ढाका, 11 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे या खसरे के लक्षणों की वजह से बच्चों की मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है। शुक्रवार से शनिवार सुबह 8 बजे के बीच 3 और मासूमों ने जान गंवा दी, और इस तरह मौत का आंकड़ा बढ़कर 753 हो गया है।
बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने इन तीनों मौत को संदिग्ध (खसरे की) श्रेणी में रखा गया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, संदिग्ध खसरा मौतों की संख्या बढ़कर 660 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला की पुष्टि के बाद खसरे से हुई मौत का आंकड़ा 93 पर स्थिर बना हुआ है।
डीजीएचएस के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में खसरे के 702 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,10,601 हो गई है।
इसी अवधि में 84 नए लैब टेस्ट में खसरा संक्रमण की पुष्टि हुई, जिससे कन्फर्म मामलों की कुल संख्या 13,410 पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले 93,491 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 89,762 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
देश में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और लोगों से बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने तथा खसरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील कर रहे हैं।
हाल ही में बांग्लादेशी दैनिक डेली स्टार में प्रकाशित रिपोर्ट केअनुसार, बांग्लादेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के बीच खसरा (मीजल्स) और अन्य संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलने का कारण प्रतिकूल परिस्थितियां, कुपोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, इलाज में देरी और बढ़ता चिकित्सा खर्च है।
रिपोर्ट में कहा गया कि खसरा एक बार फिर बांग्लादेश के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है। बांग्लादेश में हर साल पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 24,000 बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है। इसका मतलब है कि प्रतिदिन औसतन 60 बच्चों की जान निमोनिया से चली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषित बच्चों में खसरा और निमोनिया जैसी बीमारियों से गंभीर जटिलताओं और मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसका संक्रमण फैलने की क्षमता कोरोना वायरस से भी अधिक मानी जाती है। विशेष रूप से कुपोषित शिशु और छोटे बच्चे इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में बच्चों के टीकाकरण का दायरा भी लगातार घट रहा है। वर्ष 2019 में 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.9 प्रतिशत था, जो 2023 में घटकर 81.6 प्रतिशत रह गया। शहरी क्षेत्रों में यह कवरेज केवल 79 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 84.6 प्रतिशत बच्चों को पूरा टीकाकरण मिल पा रहा है।
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Created On :   11 July 2026 6:54 PM IST












