बापू का चरखा स्वावलंबन का आधार, ओडीओपी उसी भाव से ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने का अभियान सीएम योगी

बापू का चरखा स्वावलंबन का आधार, ओडीओपी उसी भाव से ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने का अभियान सीएम योगी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी के स्वदेशी और स्वावलंबन के मंत्र को आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि बापू का चरखा केवल चरखा नहीं था, बल्कि भारत के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का आधार था। उत्तर प्रदेश की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना उसी स्वदेशी के भाव को आगे बढ़ाते हुए ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बापू के स्वावलंबन के सपने को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। विकसित भारत की संकल्पना तभी पूरी होगी, जब देश आत्मनिर्भर बनेगा और इसके लिए प्रत्येक नागरिक, परिवार और गांव को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

लखनऊ, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी के स्वदेशी और स्वावलंबन के मंत्र को आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि बापू का चरखा केवल चरखा नहीं था, बल्कि भारत के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का आधार था। उत्तर प्रदेश की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना उसी स्वदेशी के भाव को आगे बढ़ाते हुए ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बापू के स्वावलंबन के सपने को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। विकसित भारत की संकल्पना तभी पूरी होगी, जब देश आत्मनिर्भर बनेगा और इसके लिए प्रत्येक नागरिक, परिवार और गांव को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बापू की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी के प्रिय भजनों का श्रवण किया और चरखा चलाकर बापू के स्वदेशी एवं स्वावलंबन के संदेश को प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता से स्वदेशी, स्वदेशी से स्वावलंबन और स्वावलंबन से ग्राम स्वराज तक बापू के विचार आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं। नया भारत बापू के इन्हीं सपनों को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

सीएम योगी ने स्वदेशी की चर्चा करते हुए अपने बचपन की स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि बचपन में हम लोग गांधी आश्रम के कपड़ों को बड़ी उत्सुकता से देखते थे। लोगों में इन वस्त्रों को लेकर विशेष उत्साह रहता था, क्योंकि ये केवल वस्त्र नहीं थे। ये भारत की आजादी के मंत्र के प्रतीक भी थे। बापू ने इन्हें स्वदेशी की भावना से जोड़कर आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने देश को चरखे के माध्यम से स्वावलंबन का संदेश दिया। चरखा केवल सूत कातने का साधन नहीं था। वह भारत के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का आधार बना। अपने श्रम, अपने उत्पाद और अपनी सामर्थ्य पर भरोसा करके देश कैसे आगे बढ़ सकता है, चरखा इसका प्रतीक बना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना उसी स्वदेशी के भाव के साथ आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लोकल से ग्लोबल’ और आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से जोड़ते हुए कहा कि बापू ने जिस स्वावलंबन का सपना देखा था, उसे नए स्वरूप में आगे बढ़ाने का कार्य हो रहा है। प्रधानमंत्री बार-बार कहते हैं कि विकसित भारत की संकल्पना तभी पूरी होगी, जब आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हम सभी मिलकर कार्य करेंगे। इस आत्मनिर्भरता की शुरुआत स्वदेशी और स्वावलंबन के भाव से होती है।

सीएम ने महात्मा गांधी की जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के पोरबंदर में एक परम वैष्णव परिवार में जन्मे बापू ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद दक्षिण अफ्रीका में वकालत की प्रैक्टिस प्रारंभ की। परिवार से मिले संस्कार उनके जीवन और संघर्ष में दिखाई दिए। उन्होंने अन्याय और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध अभियान को आगे बढ़ाया और वहां भारतीय मूल के नागरिकों को एकजुट किया। इसी संघर्ष ने आगे चलकर भारत की स्वाधीनता की अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सही मायने में जब भारत की स्वाधीनता का आंदोलन पूज्य बापू के हाथों में आया तो उन्होंने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उसका नेतृत्व किया और उसे एक व्यापक जन आंदोलन में बदल दिया। उस समय देश में हताशा और निराशा का वातावरण था। लोगों को लगने लगा था कि भारत शायद कभी स्वाधीन नहीं हो सकता। बापू के नेतृत्व और मार्गदर्शन ने इस निराशा को आशा और उत्साह में बदल दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज स्वाधीनता की नई सुबह देखने के लिए पूरे उत्साह के साथ आंदोलन का हिस्सा बन गया। बापू के नेतृत्व की विशेषता यह रही कि भारत का स्वाधीनता आंदोलन केवल चंद नगरों तक सीमित नहीं रहा। यह गांव-गांव पहुंचा और हर नर-नारी व बच्चा इस अभियान का हिस्सा बना। इसी जनभागीदारी ने स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया। सीएम ने कहा कि दुनिया के लोगों के लिए यह कौतूहल और आश्चर्य का विषय था कि आखिर वह कौन-सी चमत्कारिक ताकत है, जो भारत की स्वाधीनता के इतने बड़े अभियान से जुड़ी है। आधी धोती पहनकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले बापू के हाथ में एक छड़ी ही सहारा थी, लेकिन दुनिया ने उनके नेतृत्व की ताकत और उस चमत्कार को देखा। आज वही भारत पूज्य बापू के सपनों को साकार करते हुए आगे बढ़ रहा है। बापू ने जिन मूल्यों को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस से जोड़ा था, वे आज भी देश और समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के आंदोलन को जन आंदोलन में बदलने के लिए बापू ने जो मंत्र दिए थे, उनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि हर नागरिक स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बनाए, हर नागरिक स्वदेशी को अपने जीवन का मंत्र बनाए और प्रत्येक परिवार आत्मनिर्भर बनकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़े। बापू के ये संदेश आज भी देश के लिए मंत्र के रूप में काम कर रहे हैं। स्वच्छता केवल आसपास की सफाई का विषय नहीं है और स्वदेशी केवल किसी वस्तु के उपयोग तक सीमित विचार नहीं है। इन विचारों के केंद्र में व्यक्ति, परिवार और समाज को आत्मनिर्भर बनाकर राष्ट्र को सशक्त करने की भावना है। सीएम योगी ने कहा कि भारत की स्वाधीनता के समय बापू ने जो संकल्प लिया था, स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से उस सपने को साकार करने का कार्य किया है। देश में 12 करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए। स्वच्छ भारत अभियान न केवल स्वच्छता और स्वस्थ भारत की आधारशिला बना, बल्कि इसने लोगों को जागरूक करने के साथ नारी गरिमा की रक्षा का पाठ भी पढ़ाया।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को प्रत्येक नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाना ही बापू के संदेश को वास्तविक अर्थों में आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना को वर्तमान ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए कहा कि गांव भारत की आधारभूत इकाई हैं। लंबे समय तक हम विकास के बड़े-बड़े दावे करते रहे, लेकिन सच्चाई यह थी कि जिस गांव को विकास की आधारभूत इकाई होना चाहिए था, उसे उपेक्षित छोड़ दिया गया। आज पूज्य बापू के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लिए गांव को भी स्वावलंबन का आधार बनाया जा रहा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हर गांव में ग्राम सचिवालय का गठन किया है। इनके माध्यम से तकनीक का उपयोग करते हुए नागरिकों को गांव में ही विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। ग्राम सचिवालय स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी माध्यम बन रहे हैं। इनके माध्यम से हर गांव में चार से सात लोगों को रोजगार की सुविधा उपलब्ध हो रही है।

लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 02 अक्टूबर का दिन एक और कारण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूज्य बापू की जयंती के साथ ही यह भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बापू के अनन्य अनुयायी लाल बहादुर शास्त्री की भी पावन जयंती है। गांधी जी और शास्त्री जी का संपूर्ण जीवन चरित्र हम सभी को बड़ी प्रेरणा देता है। व्यक्ति की वाक्शक्ति में तभी ताकत होती है, जब उसके आचार व विचार में समन्वय हो। दोनों महापुरुषों ने जो कहा, उसे अपने जीवन में करके दिखाया और जितना किया, उतना ही बोला।

सीएम योगी ने कहा कि महात्मा गांधी के स्वदेशी ने भारत की जनचेतना को जागृत करते हुए स्वाधीनता का मंत्र बनने का काम किया। लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी से भरा, भारतीयता से ओतप्रोत और राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित रहा। जब देश के ऊपर संकट आया तो शास्त्री जी ने दिखाया कि कैसे वज्र बनकर भारत की सुरक्षा की जा सकती है और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सकता है। उनका ‘जय जवान-जय किसान’ का उद्घोष पूरे भारत का मंत्र बन गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय एक ओर सीमाओं पर भारत का जवान दुश्मन देशों के छक्के छुड़ा रहा था तो दूसरी ओर खेतों में अन्नदाता किसान देश को खाद्यान्न आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा था। ‘जय जवान-जय किसान’ केवल एक नारा नहीं था। इसने राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता, दोनों को एक साथ देश के संकल्प से जोड़ा। वर्ष 1965 में लाल बहादुर शास्त्री द्वारा देशवासियों को दिया गया यह मंत्र आगे चलकर भारत की आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बना।

सीएम योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत को गेहूं के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई विकसित देशों से भारत को ऐसा खाद्यान्न तक आपूर्ति किया जाता था, जो खाने योग्य नहीं होता था। आज भारत उस स्थिति से बहुत आगे निकल चुका है। देश ने न केवल खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त किया है, बल्कि दुनिया के अनेक देशों को खाद्यान्न आपूर्ति का माध्यम भी बना हुआ है। इस आत्मनिर्भरता की नींव श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री ने रखी थी।

--आईएएनएस

विकेटी/पीएम

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Created On :   2 Oct 2026 3:29 PM IST

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