भाषा विवाद पर घमासान मराठी अनिवार्यता को लेकर विरोधाभाषी बयान पर आनंद दुबे ने सरकार पर बोला हमला

भाषा विवाद पर घमासान  मराठी अनिवार्यता को लेकर विरोधाभाषी बयान पर आनंद दुबे ने सरकार पर बोला हमला
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में रहने वाले करोड़ों लोग दिल से मराठी हैं और मराठी भाषा, पहचान तथा संस्कृति का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार के भीतर ही विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं।

मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई में रहने वाले करोड़ों लोग दिल से मराठी हैं और मराठी भाषा, पहचान तथा संस्कृति का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार के भीतर ही विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि एक ओर सरकार के मंत्री ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने की बात करते हैं, जबकि उसी पार्टी के नेता इसका विरोध करते हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि वह क्या चाहती है, क्या हर पेशे से जुड़े व्यक्ति पर यह नियम लागू होगा या फिर लोगों को भाषा सीखने के लिए समय दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ 1 मई से परमिट रद्द करने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ उसी मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

मीरा रोड के नया नगर इलाके में हुई हालिया घटना पर भी आनंद दुबे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस तरह पहले जम्‍मू-कश्‍मीर के पहलगाम में धर्म के आधार पर लोगों की हत्या की घटना सामने आई थी, उसी तरह अब मीरा रोड-भायंदर क्षेत्र में सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला किए जाने की खबरें चिंताजनक हैं।

उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण क्यों नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अपराधी बेखौफ घूमते रहेंगे, तो यह सामाजिक और राजनीतिक समरसता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालांकि, उन्होंने पुलिस और एटीएस पर विश्वास जताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इसके अलावा, किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल (केईएम अस्पताल) का नाम बदलने के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। आनंद दुबे ने कहा कि इस अस्पताल का नाम आजादी से पहले का है और इसे बनाने में जिस व्यक्ति या परिवार का योगदान रहा है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिसने भी लोगों की जान बचाने के लिए काम किया है, चाहे वह भारतीय हो या विदेशी, उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने नाम बदलने की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जाए तो जनता को अधिक लाभ होगा, क्योंकि कई अस्पतालों में आज भी मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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Created On :   28 April 2026 11:06 PM IST

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