भोपाल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, शिवराज सिंह ने बांटे लोन और प्रमाण पत्र

भोपाल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम, शिवराज सिंह ने बांटे लोन और प्रमाण पत्र
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ब्यूटीशियन और सिलाई का प्रशिक्षण पूरा कर चुकी महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए और उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण भी प्रदान किए।

भोपाल, 24 अक्‍टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ब्यूटीशियन और सिलाई का प्रशिक्षण पूरा कर चुकी महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए और उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण भी प्रदान किए।

महिलाओं को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बहन-बेटियों को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर बहुत आश्चर्य और प्रसन्नता हुई कि कुछ बेटियों ने 35 दिनों का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपना काम भी शुरू कर दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण, अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारा लक्ष्य हर घर में खुशी के दीप जलाना, हर हाथ को काम देना और लोगों को आजीविका की अलग-अलग गतिविधियों से जोड़ना है। महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सक्षम बनाना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

उन्‍होंने बताया कि ब्यूटीशियन और सिलाई प्रशिक्षण का यह पहला बैच था, जिसमें विदिशा संसदीय क्षेत्र के चारो जिले विदिशा, सीहोर, देवास और रायसेन की कुल 230 महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने वाली 80 बहन-बेटियों के लोन सेंक्शन कर दिए गए हैं, ताकि वह अपना काम शुरू कर सकें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूसरे समूह का प्रशिक्षण 27 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा और यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोलेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शिवराज सिंह ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की योजना साझा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के भविष्य के लिए एक उपयोगी पहल है, लेकिन कई परिवारों में जानकारी के अभाव या आर्थिक परिस्थितियों के कारण इसमें खाते नहीं खुल पा रहे हैं और नियमित रूप से राशि जमा नहीं हो पा रही है।

उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में किए गए विश्लेषण में लगभग 86 हजार बेटियां ऐसी सामने आई हैं, जिन्हें इस योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 हजार बेटियों का अनुमान है। हमारा विचार है कि इन बेटियों के खातों में विभिन्न सहयोग से पहली किस्त के रूप में 1,000 रुपए जमा कराए जाएंगे ताकि परिवारों को योजना से जुड़ने की शुरुआत मिल सके और वे आगे नियमित रूप से राशि जमा करते रहें। इससे बेटियों के बड़े होने पर उनकी पढ़ाई-लिखाई और भविष्य की जरूरतों के लिए एक अच्छी धनराशि उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि बेटियों का भविष्य सुरक्षित हो और उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिले, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष परियोजना पर काम किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि गांव के हर परिवार को किसी न किसी आजीविका गतिविधि से जोड़ा जाए, ताकि परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि इस दिशा में समृद्ध गांव अभियान के माध्यम से भी प्रयास किए जाएंगे। यह काम आसान नहीं है और इसमें समय लगेगा, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट है कि गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जाए। इस पहल को शीघ्र ही आगे बढ़ाया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मंडीदीप में स्किल सेंटर शुरू करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। मंडीदीप में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां हैं, इसलिए वहां की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे प्रशिक्षित युवाओं को स्थानीय फैक्ट्रियों में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटरों को भी स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा, ताकि युवाओं को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि रोजगार पाने के लिए जरूरी हुनर भी मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि कोई बेरोजगार न रहे, हर व्यक्ति के हाथ में हुनर हो और हर व्यक्ति के पास रोजगार का अवसर हो। विशेष रूप से बेटियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना जरूरी है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकें और किसी भी परिस्थिति में मजबूरी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी बेटियों और बेटों के बीच व्यवहार और अवसरों को लेकर अंतर दिखाई देता है। बेटियों को विवाह के बाद नए परिवार में जाना पड़ता है और यदि वहां आर्थिक अभाव की स्थिति हो, तो उन्हें कई बार कठिनाइयों और तानों का सामना करना पड़ता है। पुराने समय में बेटियों का मायके से विदा होते समय रोना केवल एक परंपरा नहीं था, बल्कि उसके पीछे महिलाओं की पीड़ा और उनकी परिस्थितियों की कहानी भी छिपी थी। सवाल यह है कि बेटियों और बहनों को मान-सम्मान और इज्जत से भरा जीवन क्यों नहीं मिलना चाहिए?

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना, उनके भविष्य को सुरक्षित करना, उन्हें रोजगार से जोड़ना और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है। इसी दिशा में प्रशिक्षण, स्वरोजगार, कौशल विकास, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी विभिन्न पहलों को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सके।

उन्‍होंने कहा कि किसानों की आय और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें बेहतर खेती की तकनीकें सिखाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों के समूहों को दूसरे राज्यों में भेजकर उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है, ताकि वे नई तकनीकें सीखकर अपने खेतों में उनका उपयोग कर सकें और दूसरे किसानों को भी प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने कहा कि एक किसान अच्छी खेती सीखकर अपने गांव में मास्टर ट्रेनर बन सकता है और उसके अनुभव से अनेक किसान लाभान्वित हो सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि रोडमैप को जमीन पर उतारने के लिए ऐसे किसानों की आवश्यकता है, जिनके खेतों पर प्रदर्शन आधारित खेती की जा सके। इन किसानों को अच्छे बीज उपलब्ध कराकर एक-एक एकड़ में डेमोंस्ट्रेशन कराया जाएगा और पूरी देखरेख के साथ खेती के बेहतर तौर-तरीकों को अपनाया जाएगा। फल, सब्जी, गेहूं, चावल सहित विभिन्न फसलों की उन्नत खेती को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

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