चीन ने विकसित की 'दीर्घायु चावल' की नई किस्म
बीजिंग, 20 मार्च (आईएएनएस)। कई वर्षों के अध्ययन के बाद चीनी वैज्ञानिकों ने पहली बार जंगली चावल के दीर्घकालिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार मुख्य जीन की पहचान की है। इस अनुसंधान के आधार पर उन्होंने मौजूदा खेती वाले चावल से 'दीर्घायु चावल' की एक नई किस्म विकसित की है, जिसे एक बार बोए जाने के बाद कई वर्षों तक लगातार काटा जा सकता है। यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिका 'साइंस' के कवर पृष्ठ पर प्रकाशित की गई।
खेतों में उगाया जाने वाला साधारण चावल विश्व की सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक खाद्य फसलों में गिना जाता है। इसके विपरीत, इसका पूर्वज आम जंगली चावल एक बारहमासी और रेंगने वाला पौधा है, जो जंगली घासों की तरह पुनः विकसित होता रहता है। चीनी विज्ञान अकादमी के वैज्ञानिकों ने जंगली चावल के 446 प्रकारों का गहन विश्लेषण किया और अत्याधुनिक जैविक प्रजनन तकनीकों का उपयोग करते हुए उस मुख्य जीन की सफल पहचान और क्लोनिंग की, जो जंगली चावल के निरंतर वृद्धि और बारहमासी होने की क्षमता निर्धारित करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में खेती योग्य भूमि का एक बड़ा भाग दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम के पहाड़ी क्षेत्रों में फैला हुआ है। बारहमासी फसलों का विकास विशेष रूप से उन इलाकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, जहां ढलान वाले खेतों और पर्वतीय स्थलों में पैदावार तुलनात्मक रूप से कम होती है। इस प्रकार 'दीर्घायु चावल' की नई तकनीक खेती योग्य भूमि के प्रभावी उपयोग, कृषि लागत में कमी और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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Created On :   20 March 2026 6:44 PM IST











