चिराग पासवान को एनडीए और भाजपा की नीतियों का करना चाहिए विरोधः सुरेंद्र राजपूत

चिराग पासवान को एनडीए और भाजपा की नीतियों का करना चाहिए विरोधः सुरेंद्र राजपूत
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चिराग पासवान के प्रयागराज युवा संपर्क अभियान, प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की बैठक और कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को अदालत से मिली राहत पर प्रतिक्रियाएं दी।

लखनऊ, 27 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चिराग पासवान के प्रयागराज युवा संपर्क अभियान, प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की बैठक और कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को अदालत से मिली राहत पर प्रतिक्रियाएं दी।

चिराग पासवान के प्रयागराज युवा संपर्क अभियान पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हर राजनीतिक पार्टी को अपने क्षेत्र, वोटर्स और युवाओं से बात करने का अधिकार है। चिराग पासवान उसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं और राजनीतिक तौर पर अपनी पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि इस समय उन्हें एनडीए और भाजपा की उन नीतियों का विरोध करना चाहिए जिनमें वोट की चोरी, युवाओं पर असर डालने वाले पेपर लीक और नौकरियों की कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं। केंद्र और राज्य सरकारों में लगभग 50 लाख पद खाली पड़े हैं। जब भर्ती प्रक्रिया नियुक्ति के चरण तक पहुंचती है, तो लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। अगर वह युवाओं से बात करना चाहते हैं, तो उन्हें एनडीए से बाहर आ जाना चाहिए।"

प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की बैठक पर सुरेंद्र राजपूत ने कहा, "चुनाव आयोग के साथ भाजपा की मिलीभगत का भंडाफोड़ हुआ है। राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक बैठक करेगा। हालांकि अभी बैठक की तारीख तय नहीं हुई है।"

कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को अदालत से राहत मिलने पर सुरेंद्र राजपूत ने कहा, "हम संविधान का पूरा सम्मान करते हैं। राकेश राठौड़ के खिलाफ राजनीतिक साजिश हुई थी, उसका खुलासा हो गया है। अब भाजपा को बताना पड़ेगा कि भाजपा ने ओछे आरोपों का समर्थन क्यों किया? पुलिस को भी बताना पड़ेगा कि जब आरोपों में दम नहीं था तो चार्जशीट क्यों दाखिल की? भाजपा के कहने पर हमारे सांसद को परेशान किया गया था।"

कांग्रेस सांसद राकेश राठौड़ को विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी और आरोप तय करने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से शिकायतकर्ता और सांसद के बीच लंबे समय से सहमति से संबंध होने के संकेत मिलते हैं। ऐसे में विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप प्रथमदृष्टया साबित नहीं होता।

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Created On :   27 Sept 2026 3:10 PM IST

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