राहुल गांधी को बार-बार री-लॉन्च कर खुद का नुकसान कर रही कांग्रेस संजय निरुपम

राहुल गांधी को बार-बार री-लॉन्च कर खुद का नुकसान कर रही कांग्रेस संजय निरुपम
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर जामिया मिलिया इस्लामिया विवाद तक कई मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर राहुल गांधी की छवि सुधारने के लिए बार-बार प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पार्टी को ही नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े ऑडियो क्लिप की जांच, त्योहारी सीजन में दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलनों से व्यापारियों को हो रहे नुकसान और जामिया संस्थान में शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर भी अपनी राय रखी।

मुंबई, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर जामिया मिलिया इस्लामिया विवाद तक कई मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर राहुल गांधी की छवि सुधारने के लिए बार-बार प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पार्टी को ही नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े ऑडियो क्लिप की जांच, त्योहारी सीजन में दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलनों से व्यापारियों को हो रहे नुकसान और जामिया संस्थान में शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर भी अपनी राय रखी।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अक्सर विदेशों में जाकर किस प्रकार से भारत-विरोधी बयान देते हैं, उससे निश्चित तौर पर भारत की छवि पर असर पड़ता है। वे न केवल भारत की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि अपनी छवि भी खराब कर लेते हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी उन्हें दोबारा स्थापित (री-लॉन्च) करने और उनकी छवि को सुधारने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा है कि राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के एक 'फेल्ड प्रोडक्ट' हैं और उस प्रोडक्ट को बार-बार री-लॉन्च करने का जो प्रयास कांग्रेस पार्टी कर रही है, वह व्यर्थ है। उससे कांग्रेस का भी नुकसान हो रहा है और राहुल गांधी का तो पहले ही नुकसान हो चुका है।

संजय निरुपम ने कहा कि मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले नेता मनोज जरांगे पाटिल ने जो वीडियो और ऑडियो क्लिप जारी की है, उसकी जांच का आदेश मुख्यमंत्री ने दे दिया है। उस पूरी ऑडियो क्लिप में जो भी बातें कही गई हैं, उनका तब तक कोई अर्थ नहीं बनता जब तक उनकी प्रामाणिकता स्थापित नहीं हो जाती और पूरी जांच नहीं हो जाती। हमारी पार्टी के नेताओं ने स्वयं मुख्यमंत्री के पास जाकर उस ऑडियो क्लिप की जांच की मांग की और मुख्यमंत्री ने इस संबंध में निर्देश भी दिए। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि इसके पीछे कौन-सी ताकत है और उसका उद्देश्य क्या है।

उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मराठा नौजवानों को रोजगार और शिक्षा में आरक्षण दिलाने के लिए जो व्यापक आंदोलन चल रहा है, उसे प्रभावित करने का कोई षड्यंत्र रचा जा रहा हो। यह बात जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। उसके बाद ही हम सभी अपनी राय बना पाएंगे।

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि भारत में इस समय त्योहारों का मौसम है। जब त्योहारों का मौसम होता है तो दुकानदारों के लिए यह पूरे वर्ष की कमाई का एक महत्वपूर्ण समय होता है। ऐसे में अराजकता पैदा करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ जिस प्रकार से कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी, कॉकरोच जनता पार्टी और वामपंथी संगठनों द्वारा दिल्ली में विभिन्न आंदोलन किए गए, उनसे दिल्ली का व्यापारी वर्ग पहले से ही परेशान है।

उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस के व्यापारियों का कहना है कि उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। ऐसे में दुकानदारों और दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपील की है कि 1 नवंबर को कांग्रेस पार्टी द्वारा रामलीला मैदान में प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित किया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि व्यापारी भी हमारे देश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस आंदोलन करना चाहती है तो अवश्य करे, लेकिन यदि त्योहारों की अवधि तक उसे स्थगित कर दिया जाए, तो व्यापारियों को राहत मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

संजय निरुपम ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया संस्थान, जिसकी स्थापना डॉ. जाकिर हुसैन जैसे भारत के राष्ट्रवादी मुस्लिम विद्वानों ने की थी, वह संस्थान अब धीरे-धीरे विवादों का केंद्र बनता जा रहा है। इसी संस्थान से एनआरसी और सीएए के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ था। हाल के दिनों में इस संस्थान में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए जिस प्रकार का आंदोलन किया गया, उस पर हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उस आंदोलन के दौरान जो नारे लगाए गए, उन्हें लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। कुछ नारों को भारत-विरोधी बताया गया और उन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।

उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर लगाए गए नारों और कुछ अन्य गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए। साथ ही, शरजील इमाम जैसे व्यक्तियों की रिहाई की मांग को लेकर भी चर्चा हुई। जामिया मिलिया इस्लामिया, जो भारत का एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान रहा है, उसके संबंध में यह आवश्यक है कि वहां शिक्षा का माहौल बना रहे और किसी भी प्रकार की गैर-शैक्षणिक, विवादास्पद या कानून-विरुद्ध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच हो।

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संस्थान में शिक्षा, शोध और अकादमिक विकास का वातावरण बना रहे। यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों, कट्टरपंथी प्रभावों या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका हो, तो उसकी निष्पक्ष और कानूनी जांच होनी चाहिए। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि किसी संस्थान के बारे में निष्कर्ष तथ्यों, प्रमाणों और कानूनी जांच के आधार पर ही निकाले जाएं। शिक्षा संस्थानों का मूल उद्देश्य शिक्षा, शोध और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है और उसी दिशा में उनका संचालन होना चाहिए।

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