देशभर के विश्वविद्यालयों में होंगी अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं, उपग्रह प्रणालियों व रॉकेटरी का प्रैक्टिकल अनुभव

देशभर के विश्वविद्यालयों में होंगी अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं, उपग्रह प्रणालियों व रॉकेटरी का प्रैक्टिकल अनुभव
देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है। पहले चरण में सात प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस परियोजना की समीक्षा की। भारत सरकार की इस पहल का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल भारतीय युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है। पहले चरण में सात प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं में छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को इस परियोजना की समीक्षा की। भारत सरकार की इस पहल का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल भारतीय युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है।

बता दें कि इस क्षेत्र को गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए खोलने के बाद इसने पिछले पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है। जितेंद्र सिंह द्वारा की गई समीक्षा में ‘इन-स्‍पेस’ के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी दी गई। यहां भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।

सरकार का कहना है कि भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है। इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में सिंगल डिजिट तक सीमित थी। वहीं 2026 की शुरुआत तक इन स्टार्टअप्स की संख्या 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह व पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इस गति को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई पहलें शुरू की गई हैं।

स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपए का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है। वहीं, 500 करोड़ रुपए का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपए तक का अनुदान की सहायता प्रदान की जा रही है।

वहीं, इस क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं। इसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। यहां उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 व्यक्तियों को प्रमाणित किया जा चुका है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है।

हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक स्थापना के बाद से, इन-स्‍पेस को स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग से 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन-स्‍पेस ने 129 प्राधिकरण प्रदान किए हैं।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   26 April 2026 5:17 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story