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छा रहा नीदरलैंड का नशा: खतरनाक ट्रेंड मुंबई-पुणे- हैदराबाद होते हुए नागपुर पहुंचा, मुंह में रखते ही होता मतिभ्रम, 8 से 10 घंटे तक असर

Nagpur News. अभय यादव। एलएसडी (लाइसर्जिक एसिड डायथाइलामाइड) ड्रग्स की पहली बड़ी कार्रवाई के बाद अब जांच में चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आने लगे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस एलएसडी के साथ दो नामी कॉलेज के छात्र पकड़े गए, उसका ट्रेंड सीधे यूरोप के नीदरलैंड जैसे देशों से जुड़ा हुआ है, जहां यह ड्रग लंबे समय से युवाओं और रेव कल्चर का हिस्सा रहा है। अब यही खतरनाक ट्रेंड मुंबई, पुणे, हैदराबाद से होते हुए नागपुर तक पहुंच गया है।
- यूरोप के नीदरलैंड से शुरू हुआ ट्रेंड अब नागपुर तक पहुंचा
- रेव पार्टी और कॉलेज युवाओं में तेजी से फैल रहा नशा
- छोटे कागज (ब्लॉट्स) में आता है – पहचानना मुश्किल
क्या करता है
- मतिभ्रम (Hallucination)
- असली-नकली में फर्क खत्म
- 8–10 घंटे तक असर
- मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
युवाओं के लिए चेतावनी
- नशा नहीं, जीवन चुनें
- एक बार की गलती, पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकती है
- सावधान रहें – सुरक्षित रहें
वरिष्ठ अधिकारी भी हुए गंभीर
पुलिस आयुक्तालय में कार्यरत सिपाही अंकित खरे और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत हवलदार राज चौधरी को जब इस नए ड्रग्स के बारे मेंे पता चला तो उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी मालूमात दी। इसके बाद मादक पदार्थ विरोधी दस्ते के पुलिस निरीक्षक गजानन गुल्हाने के साथ मिलकर कार्रवाई की योजना बनाई गई। पुलिस आयुक्त डॉ. रवींद्र कुमार सिंगल, सहपुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, क्राइम ब्रांच पुलिस विभाग के उपायुक्त राहुल माकणीकर और सहायक पुलिस आयुक्त अभिजीत पाटील के मार्गदर्शन में उक्त कार्रवाई की गई।
छोटे-छोटे ब्लॉट्स में आती है यह ड्रग्स
जांच में सामने आया है कि एलएसडी का नेटवर्क बेहद चालाकी से काम करता है। यह ड्रग्स कागज के छोटे-छोटे ब्लॉट्स के रूप में आती है, जिसे पहचानना बेहद मुश्किल होता है। पुलिस को शक है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय सप्लाई चेन का उपयोग कर इसे भारत के बड़े शहरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां से यह छोटे शहरों में फैल रहा है।
गिरफ्त में आ रहे हैं युवा
गौरतलब है कि शुक्रवार तड़के ‘ऑपरेशन थंडर’ के तहत की गई कार्रवाई में 17 एलएसडी ब्लास्टस (0.170 ग्राम) बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 1.70 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में प्रतिष्ठित कॉलेज के छात्रों कुणाल गिरी (22) और दीपेश बोहारे (22) को गिरफ्तार किया है, जबकि उनका एक साथी फरार है। यह ड्रग मुंबई से छोटे स्टिकर शीट के रूप में मंगाया गया था, जिसे मुंह में रखकर सेवन किया जाता है और इसका असर 8 से 10 घंटे तक रहता है। सूत्रों के अनुसार, जरीपटका, वर्धमान नगर, खामला, लकड़गंज और सिविल लाइंस जैसे इलाकों के युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
पार्टी कल्चर में एंट्री
मादक पदार्थ विरोधी दस्ते के पुलिस निरीक्षक गजानन गुल्हाने का कहना है कि एलएसडी का इस्तेमाल खासतौर पर हाई-प्रोफाइल कॉलेजों और रेव पार्टियों में तेजी से बढ़ रहा है। इसकी खासियत यह है कि इसमें न तो कोई गंध होती है और न ही सेवन करने वाले को आसानी से पहचाना जा सकता है। सूत्रों के अनुसार एलएसडी (लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड) एक साइकेडेलिक ड्रग है। इसके सेवन से व्यक्ति को मतिभ्रम हो जाती है, जिसमें उसे ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई देती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं या विकृत रूप में दिखाई देती हैं।
जांच एजेंसियां अलर्ट मोड पर
पहली कार्रवाई के बाद पुलिस ने इसे सिर्फ लोकल मामला नहीं मानते हुए बड़े नेटवर्क की कड़ी के रूप में देखना शुरू कर दिया है। तकनीकी जांच और खुफिया इनपुट के जरिए सप्लाई चेन को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। एक बात और, इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि नागपुर अब सिर्फ लोकल ड्रग्स का बाजार नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नशे के कारोबार की नई कड़ी बनता जा रहा है।
Created On :   26 April 2026 5:51 PM IST












