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Nagpur News: डी मार्ट में डिस्काउंट के नाम पर सस्ते का छलावा, जेब पर डाका

Nagpur News "सबसे सस्ता, बेस्ट प्राइस और बंपर सेविंग” .... इन चकाचौंध भरे लुभावने दावे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए काफी है। हालांकि, ग्राहकों को यह नहीं पता कि इन दावों की आड़ में जो खेला खेला जा रहा है कि उसकी हकीकत कुछ और ही है। देश भर में सस्ते दामों का दावा करने वाला डी मार्ट ग्राहकों की जेब पर चुपके से डाका डाल रहा है। दरअसल, डिमार्ट ने बड़े-बड़े डिस्काउंट बोर्ड और ऑफर का ऐसा मनोवैज्ञानिक माहौल तैयार कर दिया है कि ग्राहक बिना ज्यादा सोचे- समझे खरीदारी कर लेते हैं और यही खरीदारी उनके लिए फायदे के बजाए घाटे सौदा साबित हो रही है। जिन वस्तुओं को ‘सबसे सस्ता’ बताकर बेचा जा रहा है, वही सामान लोकल होलसेल मार्केट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कम कीमत में उपलब्ध है। खाद्य सामग्री, ग्रोसरी से लेकर पर्सनल केयर से जुड़े प्रोडक्ट्स की कीमत स्थानीय बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर 5 से 25 फीसदी तक सस्ती है। यानी, डिमॉर्ट द्वारा जिस बचत का वादा किया जा रहा है, वह असल में कई मामलों में सिर्फ छलावा है।
ब्रांडेड सामान में भी ‘महंगाई का खेल’ : पड़ताल में सामने आया कि क्लॉक्स मल्टीगेन चोको फिल्स (150 ग्राम) डी मार्ट में करीब 17.50% तक महंगा बेचा जा रहा है। वहीं, गार्नियर फेसवॉश (एक्ने फाइट 100 ग्राम) लगभग 25.08% और कोलगेट टूथपेस्ट (500 ग्राम) करीब 17.59% ज्यादा कीमत पर ग्राहकों को दिया जा रहा है। ये आंकड़े सिर्फ कुछ उदाहरण हैं। आटा, तेल, चाय, बिस्किट, टूथपेस्ट और ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे रोजमर्रा के कई सामानों में इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला। यानी, जो ग्राहक सस्ता समझकर बल्क में खरीदारी कर रहे हैं, वे अनजाने में ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।
सावधानी ही असली बचत है : इस पूरे मामले में एक बात साफ है सिर्फ ‘डिस्काउंट’ देखकर खरीदारी करना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। ग्राहकों को चाहिए कि वे खरीदने से पहले कीमतों की तुलना जरूर करें, चाहे वह लोकल बाजार हो या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म। क्योंकि सस्ता दिखने वाला हर सौदा, सच में सस्ता हो” यह जरूरी नहीं।
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‘पहले लालच दो, फिर लूटो’ वाली नीति : यह भ्रम है कि बड़े स्टोर में सस्ता सामान मिलता है। हलाकि, ऐसा नहीं है। इतवारी जैसे क्षेत्र में थोक बाजार में बड़े स्टोर की तुलना में सस्ता सामान मिलता है। हमारे जैसे कारोबारी और बड़े स्टोर कंपनियों से सीधे माल लेकर 2-5% मार्जिन पर बेचते हैं। बड़े रिटेल स्टोर्स में किराया, स्टाफ और मेंटेनेंस का खर्च ज्यादा होता है, जो कीमत में जुड़ता है। वे कुछ प्रोडक्ट्स पर ही भारी डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। बाकी वस्तुओ पर दाम बढ़ा कर नुकसान की भरपाई करते हैं। यानी पहले ग्राहकों को लालच दिया जाता है। बाद में ग्राहकों को लुटा जाता है। कई ग्राहक खुद बताते हैं कि 10-15% तक का फर्क मिलता है। -नीरज गुप्ता, किराना कारोबारी
मानसिकता को प्रभावित करते हैं : बड़े रिटेल स्टोर्स ‘डिस्काउंट’ का माहौल बनाकर ग्राहकों की मानसिकता को प्रभावित करते हैं। स्टोर के अंदर भारी भीड़, बड़े-बड़े ऑफर बोर्ड और लिमिटेड टाइम ऑफर जैसे संकेत ग्राहकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे फायदे में हैं। लेकिन असल में कीमतों की तुलना किए बिना खरीदारी करना ही सबसे बड़ी गलती बन जाती है। -सुयोग मेश्राम, पूर्व सदस्य, उपभोक्ता फोरम
नागपुर में 9 स्टोर, शिकायतें समान : नागपुर में डी-मार्ट के करीब 9 स्टोर हैं। इन सभी स्टोर्स को लेकर ग्राहकों की शिकायत लगभग एक जैसी है कि यहां सस्ता नहीं, बल्कि कई बार महंगा सामान मिलता है। लगातार मिल रही इन शिकायतों के बाद भास्कर टीम ने शहर के गणेशपेठ, श्रीकृष्ण नगर और कामठी रोड स्थित स्टोर का निरीक्षण किया। जांच में खुलासा हुआ कि जिन प्रोडक्ट्स को सबसे सस्ता बताकर बेचा जा रहा है, वही सामान लोकल होलसेल मार्केट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कम कीमत में उपलब्ध है। टीम ने डिमॉर्ट में उपलब्ध खाद्य सामग्री, ग्रोसरी और पर्सनल केयर से जुड़े 10 प्रमुख प्रोडक्ट्स के दामों की तुलना की गई। इस तुलना में ज्यादातर उत्पादों के दाम डी-मार्ट में अधिक पाए गए। कुछ प्रोडक्ट्स में अंतर कम था, लेकिन कई में यह अंतर सीधे ग्राहकों की जेब पर चोट करने वाला था।
Created On :   25 April 2026 5:30 PM IST











