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सेहत का रखें ख्याल: एक्सपर्ट्स से जानिए बढ़ती गर्मियों में खुद को कैसे रखें तंदुरुस्त, पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ का करें सेवन

Nagpur News. तजिन्दर सिंह। उपराजधानी में सूरज के तेवर अब सहन से परे हैं। अप्रैल में ही लू के थपेड़े महसूस होने लगे हैं। ऐसे में जरूरी है खुद को स्वस्थ्य रखा जाए। बढ़ती गर्मी को लेकर प्रशासन अलर्ट भी जारी कर चुका है। डॉक्टर उदय बोधनकर के अनुसार गर्मी के दौरान वयस्कों के शरीर पर कई तरह के दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इनमें कुछ समस्याएं हल्की होती हैं, जबकि कुछ खतरनाक भी साबित हो सकती हैं। इन स्थितियों की सही जानकारी होने पर समय रहते बचाव और उपचार संभव है। अधिक पसीना आने से शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है, जिससे हीट एग्जॉशन यानी थकावट की स्थिति बनती है। इसके लक्षणों में अत्यधिक पसीना, कमजोरी, चक्कर, मतली और सिरदर्द शामिल हैं। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति हीट स्ट्रोक में बदल सकती है, जो बेहद गंभीर होती है। हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है और व्यक्ति को भ्रम, बेहोशी तथा गर्म व सूखी त्वचा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी होती है।
पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें
गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन भी एक बड़ी समस्या है। लगातार पसीना आने और पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसके लक्षणों में मुंह सूखना, पेशाब कम होना, थकान और चक्कर आना शामिल हैं। यदि यह स्थिति गंभीर हो जाए, तो किडनी पर भी असर पड़ सकता है।
तेज गर्मी का असर हृदय पर भी पड़ता है
इसके अलावा, तेज गर्मी का असर हृदय पर भी पड़ता है। गर्मी में रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे रक्तचाप कम हो सकता है और हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी होती है, जिससे बेहोशी या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और सिरदर्द जैसी समस्याएं
मस्तिष्क पर भी गर्मी का प्रभाव देखने को मिलता है। व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पहले से मौजूद न्यूरोलॉजिकल बीमारियाँ भी बढ़ सकती हैं और गंभीर स्थिति में भ्रम (डिलीरियम) हो सकता है।
त्वचा संबंधी समस्याएं भी गर्मी में बढ़ जाती हैं।
घमौरियां, सनबर्न और अधिक पसीने के कारण फंगल इंफेक्शन जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं।
अंत में पसीने के साथ शरीर से सोडियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक तत्व निकल जाते हैं, जिससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। इसके कारण मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी और गंभीर स्थिति में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। साथ ही, गर्मी में जीवाणुओं की वृद्धि तेजी से होती है, जिससे पेट के संक्रमण, गैस्ट्रोएन्टराइटिस और फूड पॉइजनिंग का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर जब भोजन का भंडारण सही तरीके से न किया गया हो।
बढ़ती गर्मियों में खुद को कैसे रखें तंदुरुस्त
गर्मियों का मौसम आते ही शरीर पर इसका असर साफ दिखने लगता है। थकान, चक्कर, डिहाइड्रेशन और लू जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर आप खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान रख सकते हैं।
लू से बचाव करें
गर्मी में लू लगना एक गंभीर समस्या है। बाहर निकलते समय पानी पीकर जाएं और खाली पेट धूप में न रहें। घर लौटने पर तुरंत ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य पानी लें।
साफ-सफाई और ठंडक का ध्यान रखें
रोजाना स्नान करें और घर को ठंडा रखने के उपाय अपनाएं। पंखा, कूलर या उचित वेंटिलेशन से वातावरण को आरामदायक बनाए रखें।
पर्याप्त आराम और नींद लें
गर्मी में शरीर जल्दी थक जाता है, इसलिए 7-8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। दिन में ज्यादा मेहनत करने से बचें और समय-समय पर आराम करें।
Created On :   24 April 2026 9:18 PM IST












