धनबाद जज उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने दो दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी

धनबाद जज उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने दो दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के बहुचर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी ठहराए गए राहुल वर्मा और लखन वर्मा की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों की ओर से दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

रांची, 14 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के बहुचर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी ठहराए गए राहुल वर्मा और लखन वर्मा की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों की ओर से दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

मंगलवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने इस घटना को न्यायपालिका पर हमला करार दिया। दोनों दोषियों ने धनबाद की सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से संबंधित निचली अदालत का रिकॉर्ड (एलसीआर) मंगाया था। रिकॉर्ड और पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अपील खारिज कर दी। दोषियों की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने पैरवी की।

बता दें कि 28 जुलाई 2021 की सुबह धनबाद में मॉर्निंग वॉक के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद को एक ऑटो ने टक्कर मार दी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और जांच सीबीआई को सौंपी गई।

सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद 28 जुलाई 2022 को ऑटो चालक लखन वर्मा और उसके साथी राहुल वर्मा को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद 6 अगस्त 2022 को दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों दोषी जीवन के अंतिम समय तक कारावास में रहेंगे। मामले में दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), धारा 201 (साक्ष्य मिटाने का प्रयास) और धारा 34 (समान आशय) के तहत आरोप तय किए गए थे।

हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा यथावत रहेगी। यह मामला न्यायपालिका की सुरक्षा और न्यायिक अधिकारियों पर हमलों के संदर्भ में देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है।

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Created On :   14 July 2026 5:04 PM IST

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