धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्षी नेताओं ने लोकतंत्र और छात्रों के आंदोलन का जीत बताया
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएल)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे छात्रों और युवाओं के लंबे आंदोलन की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर जुबानी हमला किया। विभिन्न राज्यों के नेताओं ने एक सुर में कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि देशभर में बढ़ते जनदबाव, छात्रों के आक्रोश और लगातार चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण देना पड़ा। साथ ही, विपक्ष नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और पेपर लीक मामलों के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी दोहराई।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डोला सेन ने कहा कि संविधान में स्पष्ट लिखा है कि अंतिम फैसला हमेशा जनता का होता है। देश की जनता की आवाज सुनी गई और उसी का परिणाम है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। भारत के लोग ही लोकतंत्र में अंतिम निर्णय लेते हैं।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिकता के आधार पर नहीं, बल्कि मजबूरी में इस्तीफा दिया है। पूरे देश में छात्रों और युवाओं का गुस्सा चरम पर पहुंच चुका था और जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन देश के हर राज्य और शहर तक फैल गया था। भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ऐसा जनाक्रोश पहले कभी देखने को नहीं मिला और यह इस्तीफा सरकार द्वारा राजनीतिक नुकसान से बचने की कोशिश का परिणाम है।
लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि देर आए, दुरुस्त आए। लंबे समय से छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठन जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह इस्तीफा लोकतंत्र, छात्रों, युवाओं और उन सभी संगठनों की जीत है, जिन्होंने इस आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे जिम्मेदारी संभालने वाले लोग अधिक जवाबदेही के साथ काम करेंगे।
भोपाल में कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने इसे लोकतंत्र की जीत करार देते हुए कहा कि नेताओं को इस पूरे घटनाक्रम से सबक लेना चाहिए और देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अपने 30-35 वर्षों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने जनता का इतना व्यापक गुस्सा पहले कभी नहीं देखा। यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते तो यह देश का अब तक का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन बन सकता था।
मुंबई में कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए यह इस्तीफा कुछ हद तक राहत देने वाला हो सकता है, लेकिन यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने सरकार से छात्रों की अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने और पेपर लीक के सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग की।
दिल्ली में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी के नेतृत्व में देशभर में चलाए गए छात्र आंदोलनों की मुख्य मांग शुरू से ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। सरकार की विफलताओं के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और सरकार लंबे समय तक इस मांग की अनदेखी करती रही। देशभर में बढ़ती आलोचना के बाद सरकार को आखिरकार इस्तीफा स्वीकार करने का निर्णय लेना पड़ा। यदि पहले ही निर्णय लिया गया होता तो छात्रों पर लाठीचार्ज, पानी की बौछार और अन्य बल प्रयोग जैसी घटनाओं से बचा जा सकता था।
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि प्रधानमंत्री को धर्मेंद्र प्रधान को बहुत पहले ही मंत्रिमंडल से हटा देना चाहिए था। आंदोलन को विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान से जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन जब वह प्रयास सफल नहीं हुए तो अंततः इस्तीफे का रास्ता अपनाना पड़ा। हमारे नेता राहुल गांधी ने सबसे पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कहा कि यह निर्णय पहले हो जाना चाहिए था ताकि इतना नुकसान न होता। पूरे देश के युवाओं का परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा कमजोर हुआ है और अब परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह ने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लंबे समय से गड़बड़ियां होती रही हैं और केवल अधिकारियों को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पूर्व में आयोजित परीक्षाओं की भी समीक्षा और पात्रता की जांच कराने की मांग उठाई।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि यह फैसला पहले भी लिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि जब देश का भविष्य सड़कों पर उतरता है तो उसे रोका नहीं जा सकता। उनके अनुसार सरकार को यह एहसास हो गया कि आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है और अब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
महाराष्ट्र के ठाणे में एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए 21 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जो बेहद शर्मनाक है। प्रधानमंत्री मोदी को पहले ही यह निर्णय ले लेना चाहिए था और अब उन्हें युवाओं की ताकत का अहसास हुआ है।
मुंबई में कांग्रेस नेता भाई जगताप ने भी इस घटनाक्रम को लोकतंत्र, छात्रों के आंदोलन और राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में नीट परीक्षा के पेपर कई बार लीक हुए और इसके बावजूद समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक संस्थागत सुधार किए जाएं तथा पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, सरकार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर देशभर के छात्रों और युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   25 July 2026 4:42 PM IST












