जम्मू-कश्मीर डोडा में बढ़ते डॉग बाइट केस, सीएमओ ने दी चेतावनी और बताया बचाव का तरीका
डोडा, 4 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विनोद शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि पिछले साल डोडा में करीब 1,510 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस साल जून तक ही 700 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि जानवरों के काटने के सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के होते हैं, हालांकि कुछ मामलों में बंदर या अन्य जंगली जानवर भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन अधिकतर घटनाएं आवारा कुत्तों के कारण हो रही हैं, जो लगातार बढ़ती संख्या और मानवीय संपर्क के कारण लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डोडा में आवारा कुत्तों की संख्या काफी अधिक है, जिसके कारण डॉग बाइट के मामले भी बढ़ रहे हैं। कई बार कुत्ते तभी आक्रामक होते हैं जब वे खुद को खतरे में महसूस करते हैं या उन्हें कोई व्यक्ति संदिग्ध लगता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई मामलों में बिना किसी उकसावे के भी कुत्ते लोगों को काट लेते हैं।
सीएमओ ने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल इलाज नहीं बल्कि रोकथाम भी है। इसके लिए आवारा कुत्तों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) और टीकाकरण (वैक्सीनेशन) बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यदि कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जाए और उन्हें समय पर वैक्सीन दी जाए, तो रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि रेबीज एक अत्यंत घातक बीमारी है, जो समय पर इलाज न मिलने पर 100 प्रतिशत तक जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन लोगों को समय पर इलाज लेना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी को कुत्ता या किसी भी जानवर ने काट लिया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और पूरा टीकाकरण करवाना चाहिए। अक्सर लोग लापरवाही करते हैं और पूरा कोर्स पूरा नहीं करते, जिससे खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर ने बताया कि रेबीज के मामले में 10 दिनों तक निगरानी का भी महत्व है। यदि काटने वाला कुत्ता 10 दिनों तक स्वस्थ रहता है, तो आमतौर पर संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। लेकिन अगर कुत्ता बीमार हो जाता है या मर जाता है, तो मरीज के लिए तुरंत उपचार आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बीमारी केवल आवारा कुत्तों से ही नहीं, बल्कि पालतू कुत्तों से भी हो सकती है, यदि वे पूरी तरह वैक्सीनेटेड न हों। इसलिए पालतू जानवरों का भी नियमित टीकाकरण और निगरानी जरूरी है।
डॉ. शर्मा ने लोगों से अपील की कि किसी भी जानवर के काटने की स्थिति में खुद से इलाज करने या अधूरा उपचार लेने की बजाय सीधे विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग झोलाछाप या केमिस्ट से आंशिक दवाएं ले लेते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि रेबीज जैसी बीमारी से बचाव केवल जागरूकता और समय पर इलाज से ही संभव है। यदि लोग पूरी सावधानी बरतें और टीकाकरण को गंभीरता से लें, तो इस बीमारी से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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Created On :   4 July 2026 1:47 PM IST












