ईडी ने रिलायंस होम फाइनेंस केस में 581 करोड़ की 31 संपत्तियां कुर्क कीं, अनिल अंबानी ग्रुप की कुल कुर्की 16,310 करोड़ पहुंची
नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11/03/2026 को रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल)/रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के मामले में 581.65 करोड़ रुपए की 31 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
कुर्क की गई संपत्तियां गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीन के टुकड़ों के रूप में हैं। यह कुर्की एफईएमए के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में 6/03/2026 को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद की गई है।
ईडी ने पहले आरसीएफएल/आरएचएफएल और आरसीओएम के बैंक धोखाधड़ी मामलों में 15,729 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां कुर्क की थीं। रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की कुल कुर्की 16,310 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा, पीएमएलए और एफईएमए के तहत सर्च ऑपरेशन के दौरान, 16,310 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की गईं।
पीएमएलए/एफईएमए के नियमों के तहत फिक्स्ड डिपॉजिट/म्यूचुअल फंड/कैश के रूप में 2.48 करोड़ रुपए फ्रीज/सीज कर दिए गए। ईडी ने एफईएमए के सेक्शन 37ए के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आर-इन्फ्रा) के 13 बैंक अकाउंट में 77.86 करोड़ रुपए का बैलेंस भी सीज कर लिया है। ईडी ने 22.07.2025 को इंडियन पीनल कोड, 1860 के सेक्शन 120-बी और 420 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के सेक्शन 13(2) के साथ सेक्शन 13(1)(डी) के तहत सीबीआई की कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
यह जांच यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत के आधार पर रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड/रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई थी। ईडी की जांच से पता चला कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने कई बैंकों/फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से पब्लिक फंड जुटाए थे। इन पब्लिक फंड्स में से 11,000 करोड़ रुपए से ज्यादा नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बन गए।
ईडी की जांच से पता चला कि आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए पब्लिक फंड्स को रिलायंस ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, वगैरह में डायवर्ट किया गया था।
पब्लिक फंड्स को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप द्वारा कंट्रोल और मैनेज की जाने वाली बड़ी संख्या में शेल/डमी एंटिटीज के जरिए डायवर्ट किया गया था। इन शेल/डमी एंटिटीज की फाइनेंशियल ताकत बहुत कम थी और कोई बिजनेस ऑपरेशन नहीं था। जांच से ग्रुप के प्रमोटर्स और खास लोगों की गलत नीयत का पता चला है।
ईडी ने अलग-अलग एंटिटीज और ग्रुप के लोगों द्वारा पब्लिक फंड्स को निकालने के तरीके का पता लगाया है। 11/03/2026 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए अटैच किए गए एसेट्स को क्राइम से हुई कमाई की वैल्यू के तौर पर अटैच किया गया है। ईडी फाइनेंशियल क्राइम करने वालों का एक्टिवली पीछा कर रहा है और क्राइम से हुई कमाई उनके सही दावेदारों को दिलाने के लिए कमिटेड है। आगे की जांच चल रही है।
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Created On :   12 March 2026 8:49 PM IST












