फ्रांस सरकार ने दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने का आदेश द‍िया, 18 सेंट प्रति लीटर तक म‍िलेगी राहत

फ्रांस सरकार ने दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने का आदेश द‍िया, 18 सेंट प्रति लीटर तक म‍िलेगी राहत
फ्रांस में ह‍िंसा और प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने शन‍िवार को लोगों को राहत पहुंचाने वाला एक आदेश जारी क‍िया। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में पीएम सेबेस्टियन ने बताया क‍ि दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने की अनुमति देने वाला आदेश अब जारी कर दिया गया है। उम्‍मीद है क‍ि इससे गैस ऑयल की कीमत में कुछ कमी आएगी।

पेर‍िस, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्रांस में ह‍िंसा और प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने शन‍िवार को लोगों को राहत पहुंचाने वाला एक आदेश जारी क‍िया। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में पीएम सेबेस्टियन ने बताया क‍ि दस मिलियन बैरल गैस ऑयल जारी करने की अनुमति देने वाला आदेश अब जारी कर दिया गया है। उम्‍मीद है क‍ि इससे गैस ऑयल की कीमत में कुछ कमी आएगी।

सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा क‍ि इन भंडारों को बाजार में उनकी खरीद कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा, जो मौजूदा बाजार कीमत से लगभग चार गुना कम है। इससे गैस ऑयल की कीमत में प्रति लीटर 18 सेंट तक की कमी आ सकती है। उम्मीद है कि यह कटौती 1 नवंबर से लागू हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा क‍ि एक बात सुनिश्चित की गई है क‍ि इस कदम से होने वाला पूरा आर्थिक लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा और ईंधन की कीमतों में दिखाई देगा। इस फैसले का फायदा सिर्फ सामान्य उपभोक्ताओं को ही नहीं, बल्कि नॉन-रोड गैस ऑयल, मछली पकड़ने वाले उद्योग में इस्तेमाल होने वाले गैस ऑयल, घरेलू हीटिंग फ्यूल ऑयल और विदेशी क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले गैस ऑयल के उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। इस कदम का उद्देश्य ईंधन की लागत कम करना और लोगों व कारोबारों को बढ़ती ऊर्जा कीमतों से राहत देना है।

फ्रांस में बीते सप्‍ताह बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर प्रदर्शनों का दौर चला। सरकार ने हालात पर काबू पाने के ल‍िए कर्फ्यू लगाए। बीते सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान लूटपाट की घटनाओं के बाद कुछ इलाकों में आंशिक कर्फ्यू के न‍िर्देश द‍िए थे। साथ ही जरूरत पड़ने पर आपातकाल की स्थिति घोषित करने की बात भी कही गई थी।

सितंबर से फ्रांस में छात्रों के कई बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं और पढ़ाई की परिस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब फ्रांस में महंगाई, ईंधन की कीमतें, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

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