गांव के मैदानों से ओलंपिक पोडियम तक, पंजाब के खेल कल्चर को फिर से जीवित करना है सीएम भगवंत मान

गांव के मैदानों से ओलंपिक पोडियम तक, पंजाब के खेल कल्चर को फिर से जीवित करना है  सीएम भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने को लेकर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखे अपने लेख में उन्होंने कहा कि उनका सपना पंजाब को फिर से देश में खेलों की 'नर्सरी' बनाना है और 2036 ओलंपिक में भारत की मेडल टैली में पंजाब का बड़ा योगदान होना चाहिए।

चंडीगढ़, 29 सितंबर (आईएएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने को लेकर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखे अपने लेख में उन्होंने कहा कि उनका सपना पंजाब को फिर से देश में खेलों की 'नर्सरी' बनाना है और 2036 ओलंपिक में भारत की मेडल टैली में पंजाब का बड़ा योगदान होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने लिखा, "एक जोशीले राज्य का निवासी होने के नाते, मैं यह बताना चाहता हूं कि खेल मेरे लिए, और पंजाब व यहां के लोगों के लिए क्या मायने रखते हैं। हालांकि पंजाब मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन यह सदियों से योद्धाओं और नायकों की धरती भी रहा है। कड़ी मेहनत और पसीना बहाना, ये बातें खेती और खेल, दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं। असल में, ये हमारे अस्तित्व और पहचान का मूल आधार हैं।"

भगवंत मान ने बताया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाला तो खेल कल्चर को फिर से जिंदा करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक थी। इसलिए उन्होंने खेल विभाग को मुख्यमंत्री कार्यालय के तहत अपनी सीधी देखरेख में रखा। उन्होंने मोहाली, पटियाला और बठिंडा के लोगों का हाल ही में आयोजित मैराथन सीरीज में उत्साह के साथ हिस्सा लेने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि बठिंडा में हुई मैराथन में सभी उम्र के 20,000 से ज्यादा धावकों ने हिस्सा लिया। आने वाले महीनों में पूरे राज्य में ऐसी और भी मैराथन आयोजित करने की योजना है।

सीएम ने कहा कि पंजाब का खेल कल्चर जमीनी स्तर से जुड़ा हुआ है, जिसमें 'ग्रामीण ओलंपिक' से लेकर 'खेड़ां वतन पंजाब दियां' तक शामिल हैं। यह पंजाब के सभी गांवों और शहरों में 38 अलग-अलग खेलों के जरिए प्रतिभाओं को निखारने की एक अहम पहल है।

उन्होंने कहा कि 2022 से पहले पंजाब में 'खेड़ां वतन पंजाब दियां' जैसी इतनी बड़ी पहल कभी नहीं देखी गई थी। पिछली सरकारों ने गांवों और कस्बों में मौजूद खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कभी भी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर या सपोर्ट सिस्टम नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ प्रतियोगिताएं आयोजित करके चैंपियन नहीं बनाए जा सकते। एक बच्चे को खेलने के लिए मैदान, मार्गदर्शन के लिए कोच, अभ्यास के लिए जरूरी सामान और मुकाबला करने के लिए पर्याप्त मौकों की जरूरत होती है। पिछले पांच ओलंपिक खेलों में, भारत के मेडल की संख्या कभी भी सात से ज़्यादा नहीं रही। पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर, मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूंगा कि 2036 के ओलंपिक खेलों में भारत के मेडल की संख्या में पंजाब के निवासियों का योगदान काफी ज्यादा हो। मैं चाहता हूं कि 2036 के ओलंपिक में पंजाब के लोग भारत के लिए कम से कम तीन से चार गोल्ड मेडल जीतें।"

उन्होंने बताया कि अभी राज्य के चार एथलीट क्रिकेट, हॉकी और बास्केटबॉल में भारतीय टीमों की कप्तानी कर रहे हैं। हांग्जो में हुए 2023 एशियाई खेलों में पंजाब के एथलीटों ने भारत के लिए 20 मेडल जीते, जिनमें आठ गोल्ड, छह सिल्वर और छह ब्रॉन्ज शामिल थे। यह एशियाई खेलों के 72 साल के इतिहास में राज्य का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।

मान सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का जिक्र करते हुए सीएम ने लिखा कि 2022 से स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया गया है। सरकार 3,000 आधुनिक ग्रामीण खेल के मैदान विकसित कर रही है, जिनमें लेजर-लेवल वाले मैदान, चेन-लिंक फेंसिंग, फ्लड लाइट्स, जॉगिंग ट्रैक और विभिन्न खेलों के लिए सुविधाएं होंगी। फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट के लिए स्टैंडर्ड स्पोर्ट्स किट भी दी जा रही है।

इसके अलावा राज्य भर के गांवों में इनडोर जिम स्थापित किए जा रहे हैं। एक बार जब ये मैदान और जिम बनकर तैयार हो जाएंगे, तो अगले 3,000 गांवों को कवर किया जाएगा और यह पहल तब तक जारी रहेगी जब तक पंजाब का हर गांव इसमें शामिल नहीं हो जाता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों को पंजाब की नशीली दवाओं की समस्या के खिलाफ लड़ाई के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है। खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से युवाओं की ऊर्जा रचनात्मक दिशा में लगती है। खेल के मैदान ऐसी जगहें हैं जहां युवा एक साथ आ सकते हैं, सक्रिय रह सकते हैं और अनुशासन की भावना विकसित कर सकते हैं। सरकार अकेले खेल संस्कृति नहीं बना सकती। माता-पिता को भी अपने बच्चों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 'खेड़ां वतन पंजाब दियां' केवल खेलों का उत्सव नहीं, बल्कि 'पंजाबियत' का उत्सव है।

इस साल 'खेड़ां वतन पंजाब दियां' की शुरुआत 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के दिन हुई है। सीएम ने कहा, "यह क्लासरूम के शिक्षकों से लेकर खेल के मैदान में कोच और ट्रेनर तक, सभी के प्रति हमारे सम्मान को दर्शाता है। यह मेरी दिली इच्छा, मेरी उम्मीद और मेरा संकल्प है। पंजाब देश का नेतृत्व करेगा। हमारा सपना: एक जीवंत, समृद्ध पंजाब (रंगला पंजाब)।"

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   29 Sept 2026 3:27 PM IST

Tags

Next Story