अदाणी ग्रुप के धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में बनेंगे 1.25 लाख घर, 10 लाख से अधिक झुग्गीवासियों को मिलेगा पुनर्वास
मुंबई, 7 जून (आईएएनएस)। धारावी में अदाणी समूह द्वारा एशिया की सबसे बड़ी शहरी पुनर्विकास परियोजना में 10 लाख से अधिक झुग्गीवासियों का पुनर्वास होगा, जिसके लिए 125,000 घरों का निर्माण किया जा रहा है।
एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 600 एकड़ में फैले धारावी को एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती माना जाता है। इसमें दस लाख से अधिक लोग रहते हैं, साथ ही यहां चार बड़ी इंडस्ट्री जैसे मिट्टी के बर्तन बनाना, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा और प्लास्टिक स्क्रैप उद्योग शामिल है।
2022 में स्वीकृत धारावी पुनर्विकास परियोजना को एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत चलाया जा रहा है। इसमें महाराष्ट्र सरकार की 20 प्रतिशत और अदाणी समूह की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसका उद्देश्य झुग्गीवासियों को ऊंची इमारतों में पुनर्वासित करके, बुनियादी ढांचे को बनाकर और आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के निर्माण के लिए मुक्त बिक्री क्षेत्र का उपयोग करके झुग्गी बस्ती को एक शहरी ट्रांजिट हब में बदलना है।
रिपोर्ट में बताया गया कि पुनर्विकास परियोजना 225 मिलियन स्क्वायर फीट के क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें से 95 मिलियन स्क्वायर फीट पुनर्वास क्षेत्र और 130 मिलियन स्क्वायर फीट क्षेत्र मुक्त बिक्री क्षेत्र है। पुनर्वास क्षेत्र में 10 लाख से अधिक झुग्गीवासियों को शामिल किया गया है, जिनके लिए 1,25,000 से अधिक आवास इकाइयों का निर्माण किया जाना है। इनमें से आधी इकाइयां धारावी के मौजूदा क्षेत्र में बनाई जानी हैं, जबकि शेष इकाइयां एमएमआर क्षेत्र के छह इलाकों में फैली हुई हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से अदाणी समूह के लिए 130 मिलियन स्क्वायर फीट मुक्त बिक्री क्षेत्र भी उपलब्ध हो जाता है, जो मुंबई के केंद्रीय व्यापार जिले बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। यह वित्त वर्ष 2026 में शहर की आवासीय मांग से लगभग 2.5 गुना अधिक क्षेत्र है।
रिपोर्ट के अनुसार, अदाणी समूह की इस क्षेत्र में आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ प्रमुख बुनियादी ढांचे के उन्नयन की योजना है, जिसमें तीन मेट्रो स्टेशनों वाला एक बहु-आयामी परिवहन केंद्र, बस डिपो, खेल केंद्र, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, ग्रीन एरिया और पैदल मार्ग शामिल हैं।
अदाणी समूह का लक्ष्य अगले सात से आठ वर्षों में परियोजना के पुनर्वास भाग को पूरा करना है। भारतीय रेलवे की भूमि पर पहली इमारत दिसंबर 2026 में सौंप दी जाएगी और वित्त वर्ष 2027 में 30,000 इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी पुनर्वासित इकाइयों के लिए 10 वर्षों का संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) प्रदान करने, मीठी नदी और देवनार डंपिंग ग्राउंड की सफाई करने, मीठी नदी के किनारे 6 किलोमीटर लंबी मैंग्रोव क्रीक और मरीन ड्राइव शैली का सैरगाह विकसित करने के साथ-साथ अन्य अवसंरचना उन्नयन की भी योजना बना रही है।
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Created On :   7 Jun 2026 4:21 PM IST












