प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में अफगानिस्तान 180 देशों में 175वें स्थान पर

प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में अफगानिस्तान 180 देशों में 175वें स्थान पर
अफगानिस्तान को वर्ष 2026 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों में 175वां स्थान मिला है। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी।

काबुल, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान को वर्ष 2026 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों में 175वां स्थान मिला है। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान का कुल स्कोर 2025 में 17.88 से बढ़कर 2026 में 19.51 हो गया है, जो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति में मामूली सुधार दर्शाता है। हालांकि इसके बावजूद देश दुनिया के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल है।

आरएसएफ प्रेस स्वतंत्रता का आकलन पांच मानकों - राजनीतिक, आर्थिक, कानूनी, सामाजिक और सुरक्षा - के आधार पर करता है।

राजनीतिक मानक, जिसमें मीडिया पर सरकारी प्रभाव और संपादकीय स्वतंत्रता को परखा जाता है, उसमें अफगानिस्तान 2025 के 163वें स्थान से सुधरकर 2026 में 158वें स्थान पर पहुंचा।

आर्थिक मानक, जिसमें पत्रकारिता की वित्तीय स्थिति, फंडिंग, विज्ञापन और मीडिया संस्थानों की स्थिरता को देखा जाता है, 2025 और 2026 दोनों में 165वें स्थान पर रहा।

कानूनी मानक, जिसमें प्रेस स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले कानूनों और नियमों का आकलन किया जाता है, उसमें अफगानिस्तान लगातार 178वें स्थान पर बना रहा।

सामाजिक मानक, जिसमें सामाजिक दबाव, भेदभाव और सांस्कृतिक माहौल में पत्रकारों के स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता को परखा जाता है, उसमें भी देश 175वें स्थान पर कायम रहा।

सुरक्षा मानक, जिसमें हिंसा, गिरफ्तारी और पत्रकारों को मिलने वाली धमकियों जैसे जोखिमों का मूल्यांकन होता है, उसमें अफगानिस्तान 2025 के 175वें स्थान से गिरकर 2026 में 177वें स्थान पर पहुंच गया।

आरएसएफ ने कहा कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान का मीडिया परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। संगठन ने कहा कि तालिबान की वापसी ने प्रेस स्वतंत्रता की “मौत की घंटी” बजा दी। अब मीडिया संस्थानों को ऐसे माहौल में सरकार नियंत्रित सूचनाएं प्रसारित करनी पड़ रही हैं, जहां न बहुलवाद है और न ही असहमति की आवाजें।

रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के सत्ता में लौटने के तीन महीने के भीतर 43 प्रतिशत मीडिया संस्थान बंद हो गए। देश के लगभग 12 हजार पत्रकारों में से दो-तिहाई से अधिक इस पेशे को छोड़ चुके हैं।

महिला पत्रकारों पर भी बड़ा असर पड़ा है। 10 में से 8 महिला पत्रकार अब काम नहीं कर रहीं।

आरएसएफ ने कहा कि 2021 के बाद कानूनी प्रतिबंधों में बढ़ोतरी हुई है। मीडिया सामग्री को नियंत्रित करने वाले नियमों और 2024 में लागू “सदाचार के प्रसार और अवगुण रोकथाम” कानून के कारण कुछ टीवी चैनलों को बंद करना पड़ा और सामग्री पर और पाबंदियां लगीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई है, जिससे स्वतंत्र मीडिया के लिए फंडिंग कम हुई और कई संस्थानों को बंद करना पड़ा या कामकाज सीमित करना पड़ा।

संगठन ने बताया कि सुरक्षा जोखिम अब भी बेहद ऊंचे हैं और पत्रकारों को तालिबान द्वारा गिरफ्तारी का लगातार डर बना रहता है। बिगड़ते हालात के चलते कई पत्रकार देश छोड़ने को मजबूर हुए हैं और अब केवल सीमित स्वतंत्र आवाजें ही देश के बाहर से सक्रिय हैं।

आरएसएफ के अनुसार, 2026 में अफगानिस्तान में चार पत्रकार अब भी हिरासत में हैं।

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Created On :   30 April 2026 9:01 PM IST

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