राजस्थान एएनटीएफ ने सात साल बाद केरल में भगोड़े तस्करी सरगना को गिरफ्तार किया

राजस्थान  एएनटीएफ ने सात साल बाद केरल में भगोड़े तस्करी सरगना को गिरफ्तार किया
अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने 25,000 रुपए के इनामी भगोड़े तस्कर को गिरफ्तार किया है। यह तस्कर पिछले सात वर्षों से केरल में फर्जी पहचान के साथ रहकर कानून की पकड़ से बच रहा था।

जयपुर, 23 जून (आईएएनएस)। अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए, राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने 25,000 रुपए के इनामी भगोड़े तस्कर को गिरफ्तार किया है। यह तस्कर पिछले सात वर्षों से केरल में फर्जी पहचान के साथ रहकर कानून की पकड़ से बच रहा था।

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा का रहने वाला आरोपी रंजीत दायमा उर्फ रंजीत बंजारा, 'ऑपरेशन यमलकमली' नाम के एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया।

यह ऑपरेशन कथित नशीले पदार्थों के तस्कर रमेश बंजारा से मिली जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था, जिसे पहले एएनटीएफ ने 'ऑपरेशन मदाविकधाट' के तहत गिरफ्तार किया था।

एएनटीएफ के इंस्पेक्टर जनरल विकास कुमार के अनुसार, रंजीत, रमेश बंजारा का करीबी साथी और रिश्तेदार था और नशीले पदार्थों के नेटवर्क की सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभाता था।

उसे पकड़ने के लिए एएनटीएफ के जवान राजस्थान से केरल तक लगभग 2,500 किलोमीटर का सफर करके गए, जहां आरोपी कई सालों से दूर-दराज इलाकों में छिपा हुआ था।

जांचकर्ताओं ने बताया कि रंजीत ने कन्नड़, तेलुगु और मलयालम भाषाएं सीखकर केरल के स्थानीय समुदायों में खुद को अच्छी तरह घुला-मिला लिया था।

शोरनूर इलाके में वह इतनी अच्छी तरह मलयालम बोलता था कि स्थानीय लोगों को लगता था कि वह वहीं का रहने वाला है; इसी वजह से राजस्थान में वॉन्टेड होने के बावजूद वह पकड़ा नहीं गया।

पुलिस की जांच से पता चला कि जहां रमेश बंजारा कथित तौर पर नशीले पदार्थों के सौदे करता था, वहीं रंजीत सुरक्षित ठिकानों से नशीले पदार्थों के ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन का काम संभालता था।

इसके बदले में उसे कथित तौर पर प्रति किलोग्राम लगभग 500 रुपए का कमीशन मिलता था। 100 से 500 किलोग्राम पोस्ता भूसा (डोडा-चूरा) की खेप के लिए उसकी कमाई कथित तौर पर 50,000 रुपये से 2 लाख रुपए के बीच होती थी।

फरार रहने के दौरान, रंजीत केरल के वडक्कनचेरी में कंबल की दुकान चलाता था। पुलिस ने बताया कि वह कंबल बेचने के लिए रोजाना मोटरसाइकिल से लगभग 150 किलोमीटर का सफर करता था और अपनी पहचान छिपाने के लिए इस कारोबार का इस्तेमाल करता था।

जांचकर्ताओं को शक है कि केरल लौटने से पहले वह तस्करी नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने के लिए समय-समय पर राजस्थान और मध्य प्रदेश जाता रहता था।

शोरनूर पहुंचने के बाद, एएनटीएफ के जवानों ने राजस्थान के कारीगर बनकर इलाके की रेकी की। आखिरकार उन्हें पता चला कि रंजीत कंबल बेचने के लिए पहाड़ी नेलियामपति इलाके में गया है। इसके बाद अधिकारियों ने संभावित ग्राहक बनकर उसे बड़ी खरीदारी के बहाने अपनी गाड़ी के पास बुलाया और फिर हिरासत में ले लिया।

शुरुआती पूछताछ के दौरान, रंजीत ने कथित तौर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पोस्ता भूसा सप्लाई करने की बात कबूल की। खबरों के मुताबिक, उसने जांच करने वालों को बताया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं और उसे यह भी नहीं पता था कि किस राज्य की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

आरोपी को राजस्थान लाया गया है और अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क के बारे में और जानकारी हासिल करने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है।

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Created On :   23 Jun 2026 11:33 PM IST

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