अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान जारी, ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक इम्तिहान

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान जारी, ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक इम्तिहान
अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। दुनियाभर की नजरें इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज और नीतियों पर जनता की राय के रूप में देखा जा रहा है। हाल के समय में ट्रंप की कई नीतियों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।

न्यूयॉर्क, 3 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। दुनियाभर की नजरें इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कामकाज और नीतियों पर जनता की राय के रूप में देखा जा रहा है। हाल के समय में ट्रंप की कई नीतियों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।

सोमवार को अपनी आखिरी चुनावी रैली में ट्रंप ने इसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव बताया।

सबसे पहले स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजे वर्मोंट राज्य में मतदान शुरू हुआ। अमेरिका के विशाल भूभाग में अलग-अलग समय पर मतदान होने के कारण अलास्का आखिरी राज्य होगा जहां मतदान समाप्त होगा। सोमवार शाम तक 174 मिलियन मतदाताओं में से लगभग 57 मिलियन लोग डाक मतपत्र या अग्रिम मतदान (अर्ली वोटिंग) के जरिए अपना वोट डाल चुके थे। बाकी मतदाता मंगलवार को मतदान कर रहे हैं।

चुनाव के शुरुआती रुझान वॉशिंगटन के समयानुसार आधी रात के आसपास सामने आने की उम्मीद है, लेकिन अंतिम नतीजे आने में कई दिन या यहां तक कि कई सप्ताह भी लग सकते हैं, क्योंकि कुछ जगहों पर मतगणना, पुनर्गणना और कानूनी चुनौतियां भी हो सकती हैं।

मतदान के दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं। न्यूयॉर्क सिटी के उत्तर में स्थित वेस्टचेस्टर काउंटी में वोटिंग मशीनें काम नहीं कर रही थीं, जिसके बाद मतदाताओं से कहा गया कि वे अपने कागजी मतपत्र चुनाव अधिकारियों को सौंप दें।

हालांकि ट्रंप का नाम सीधे तौर पर मतपत्रों पर नहीं है, क्योंकि चुनाव हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों, 36 गवर्नर पदों और हजारों राज्य और स्थानीय सीटों के लिए हो रहा है। फिर भी ट्रंप ने इस चुनाव को अपने नेतृत्व पर जनमत संग्रह जैसा बना दिया है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार मतदाताओं से कहा, "मान लीजिए कि मेरा नाम ही मतपत्र पर है।"

ज्यादातर सर्वेक्षणों में संकेत मिले हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर सकती है, जबकि सीनेट में मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।

ट्रंप के बयान भी इस ओर इशारा करते हैं कि उन्हें कठिन मुकाबले का अंदाजा है। 20 राज्यों में 30 रैलियां करने के बाद उन्होंने सोमवार को कहा, "किसी वजह से सत्ता में बैठा राष्ट्रपति आमतौर पर मिडटर्म चुनाव नहीं जीतता, लेकिन हमने पूरी ताकत लगा दी है।"

उनके प्रचार अभियान का बड़ा हिस्सा उन राज्यों में केंद्रित रहा जिन्हें आमतौर पर रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। इससे यह संकेत मिला कि वह अपने पारंपरिक समर्थक आधार को मजबूत बनाए रखने को लेकर चिंतित थे।

इसी दौरान अमेरिका में मतदान हो रहा था और दूसरी तरफ ईरान के केश्म द्वीप से ऐसी खबरें आ रही थीं जो उस मुद्दे से जुड़ी थीं जिसने ट्रंप की लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाया है। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

अमेरिका ने दावा किया कि उसने सोमवार को केश्म द्वीप पर एक सीमित रक्षात्मक कार्रवाई की।

आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो हालिया तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत रही, जिसे अर्थशास्त्री अच्छा प्रदर्शन मानते हैं लेकिन सितंबर में महंगाई दर 3.7 प्रतिशत रही, जिसका असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर साफ दिखाई दिया। माना जा रहा है कि इससे ट्रंप की लोकप्रियता प्रभावित हुई।

सर्वेक्षणों के अनुसार, 2024 का चुनाव 49.8 प्रतिशत वोटों के साथ जीतने वाले ट्रंप के समर्थन में अब काफी गिरावट आई है। पोल्स के औसत आंकड़े दिखाते हैं कि कांग्रेस चुनावों में डेमोक्रेट्स को लगभग 52.1 प्रतिशत समर्थन मिल सकता है। इसी तरह ट्रंप की जॉब अप्रूवल रेटिंग उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में 50.3 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 39.1 प्रतिशत रह गई है। वहीं, अस्वीकृति दर बढ़कर 58.8 प्रतिशत पहुंच गई है। इन आंकड़ों का कांग्रेस की सीटों पर क्या असर पड़ता है। यह चुनाव नतीजों से साफ होगा। साथ ही यह भी पता चलेगा कि चुनाव पूर्व सर्वेक्षण कितने सही साबित होते हैं।

यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो वे ट्रंप के दूसरे और अंतिम कार्यकाल के बाकी दो वर्षों में उनकी कई नीतियों और योजनाओं को आगे बढ़ाने में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। अगर सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

हालांकि दूसरी ओर ट्रंप के पास कार्यकारी आदेशों (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स) के जरिए कई फैसले लेने का विकल्प भी रहेगा, जिससे राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमाओं को लेकर नई कानूनी और राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, वह अपने न्याय विभाग के जरिए डेमोक्रेट्स और अपने आलोचकों के खिलाफ कार्रवाई को भी और तेज कर सकते हैं।

मंगलवार सुबह ट्रंप ने एक और बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह इजरायल को दी जाने वाली 4 अरब डॉलर की सहायता बंद करने पर विचार कर रहे हैं। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम उन्हें सबसे ज्यादा मदद देते हैं और अब उन्हें इसकी जरूरत नहीं है।"

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस फैसले को लेकर उनसे सहमत हैं।

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