ईरान युद्ध का असर, बांग्लादेश और पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा खतरा रिपोर्ट

ईरान युद्ध का असर, बांग्लादेश और पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा खतरा  रिपोर्ट
एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट से दक्षिण एशियाई देशों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के लिए ज्यादा खतरा है। ये देश इम्पोर्टेड एनर्जी पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं और रिजर्व सप्लाई लिमिटेड है।

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट से दक्षिण एशियाई देशों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के लिए ज्यादा खतरा है। ये देश इम्पोर्टेड एनर्जी पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं और रिजर्व सप्लाई लिमिटेड है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये देश तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में संभावित रुकावटों के लिए खास तौर पर कमजोर हैं, इसलिए ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लंबे समय तक कीमत और सप्लाई का झटका उनकी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स को प्रभावित कर सकता है।

एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स एक विश्लेषक-आधारित संस्था है, जो क्रेडिट रेटिंग, रिसर्च और सस्टेनेबल फाइनेंस से जुड़ी राय प्रदान करती है। इसने कहा कि ऐसी इनसाइट्स मार्केट भागीदारों को मुश्किलों को स्पष्टता में बदलने और विश्वास के साथ फैसले लेने में मदद करने के लिए जरूरी हैं।

पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में आर्थिक रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि प्रोग्रेस हुई है, लेकिन एनर्जी की लगातार ऊंची कीमतें और ट्रेड और रेमिटेंस में संभावित रुकावटें उनकी नाजुक इकोनॉमी को पटरी से उतार सकती हैं।

इसमें यह भी बताया गया है कि हाइड्रोपावर जेनरेशन पर अपनी निर्भरता और ज्यादा संतुलित वित्तीय स्थिति के कारण लाओस पर इसका असर कम है। हालांकि, यह अभी भी लंबे समय तक चलने वाले एनर्जी कीमत और सप्लाई के झटकों के प्रति कमजोर है, लेकिन इसकी लॉन्ग-टर्म रेटिंग्स पर सकारात्मक आउटलुक का समर्थन करने वाली स्थितियां अभी भी बनी हुई हैं।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने कहा, "बांग्लादेश पर हमारी रेटिंग्स शायद हमारे बेस-केस सिनेरियो से जुड़े शॉर्ट-टर्म आर्थिक रुकावटों का सामना कर सकती हैं।"

अगर ऊर्जा की कीमत में बढ़ोतरी उम्मीद से ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो देश को विकास, मुद्रास्फीति और इसके बाहरी संतुलन के लिए बढ़ते रिस्क का सामना करना पड़ सकता है।

फ्यूल की ज्यादा कीमतें अगले तीन से छह महीनों में महंगाई में धीरे-धीरे होने वाली मुद्रास्फीति की गिरावट को रोक सकती हैं और अर्थव्यवस्था की रिकवरी की रफ्तार को कमजोर कर सकती हैं।

रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कच्चे और रिफाइंड तेल प्रोडक्ट्स के लिए लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। तेल के रिजर्व एक महीने से भी कम समय तक चलने की संभावना है, जिसके बाद अगर इम्पोर्ट पर रोक लगी रही तो खपत को रोकने के उपाय और सख्त हो सकते हैं।

बांग्लादेश में लगभग 50 फीसदी बिजली गैस से बनती है, और इसकी लगभग एक चौथाई गैस की मांग आयात से पूरी होती है, जिस पर पश्चिम एशिया में लंबे समय तक संघर्ष चलने की स्थिति में भी असर पड़ सकता है।

देश पहले से ही लगातार बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है, जो जनवरी में 8.6 फीसदी से बढ़कर फरवरी में 9.2 फीसदी हो गई, साथ ही 2024 के मध्य में पिछली सरकार के गिरने के बाद विकास में लंबे समय तक मंदी रही।

बांग्लादेश का रेवेन्यू-टू-जीडीपी दर सभी संप्रभु देशों में सबसे कम है, जो जून 2026 को खत्म होने वाले मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 9 फीसदी होने का अनुमान है।

यह युद्ध बांग्लादेश के बेहतर हो रहे एक्सटर्नल बैलेंस की स्थिति के लिए भी एक अनचाही रुकावट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 मार्च, 2026 तक फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व बढ़कर 29.6 बिलियन डॉलर हो गया, जो 2025 में इसी समय के 19.7 बिलियन डॉलर से काफी ज्यादा है।

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Created On :   30 March 2026 4:45 PM IST

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