लोन वसूली के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने दिखाई सख्ती, अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी

लोन वसूली के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने दिखाई सख्ती, अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर के सहकारी बैंकों में क्रेडिट मैनेजमेंट सिस्टम में कई सुधार शुरू किए हैं। इसका मकसद बैड लोन की पुरानी समस्या को हल करना और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर्स) से बकाया रकम वसूलना है।

कोलकाता, 12 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर के सहकारी बैंकों में क्रेडिट मैनेजमेंट सिस्टम में कई सुधार शुरू किए हैं। इसका मकसद बैड लोन की पुरानी समस्या को हल करना और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर्स) से बकाया रकम वसूलना है।

राज्य के सहकारिता मंत्री अशोक कीर्तनिया ने कई सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की है और विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे क्रेडिट अनुशासन को मजबूत करने और लोन वसूली के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करें।

मंत्री ने विभाग के अधिकारियों को जानबूझकर लोन न चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर्स) की पुरानी समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है।

सहकारिता विभाग के सूत्रों के अनुसार, शहरी सहकारी बैंकों के लिए प्रस्तावित खाका तीन मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।

पहला, लोन आवेदकों की लोन चुकाने की क्षमता का सही आकलन करने और लोन मंजूर करने से पहले संभावित जोखिमों की पहचान करने के लिए एक मजबूत जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) प्रक्रिया शुरू करना।

दूसरे हिस्से में जानबूझकर लोन न चुकाने वालों की पहचान करना और वसूली की कार्रवाई शुरू करना शामिल है, जिसमें जरूरत पड़ने पर संपत्ति की कुर्की भी शामिल है।

तीसरा हिस्सा लोन मंजूर करने और बांटने में हुई चूक के लिए जवाबदेही तय करने से जुड़ा है, जिसमें उन क्रेडिट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव है जिन्होंने जानबूझकर उधारकर्ताओं की लोन चुकाने की क्षमता की कमी को नजरअंदाज किया।

मंत्री अशोक कीर्तनिया ने कहा कि डिफॉल्टर्स की राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वसूल न हो पाए लोन के लिए जिम्मेदारी की जांच की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए गए तो सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन और कार्यरत अधिकारियों के वेतन से पैसा काटा जा सकता है।

विभाग के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान सहकारी बैंकों में जांच-पड़ताल के नियमों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता था और स्थानीय सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की सिफारिशों से लोन मंजूर किए जाते थे। उन्होंने दावा किया कि जहां कुछ क्रेडिट अधिकारी मिलीभगत में शामिल थे, वहीं कई लोगों पर बिना उचित जांच के लोन मंजूर करने का दबाव भी था।

प्रस्तावित सुधारों से सहकारी बैंकों में वित्तीय अनुशासन मजबूत होने, बैड लोन के जमाव को रोकने और लोन मंजूरी प्रक्रिया में जवाबदेही में सुधार होने की उम्मीद है।

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Created On :   12 Sept 2026 3:27 PM IST

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