महिला आरक्षण कानून पर भाजपा की बड़ी रणनीति बैठक, राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मंथन

महिला आरक्षण कानून पर भाजपा की बड़ी रणनीति बैठक, राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मंथन
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) के प्रभावी क्रियान्वयन और जनजागरूकता को लेकर पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) के प्रभावी क्रियान्वयन और जनजागरूकता को लेकर पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की।

बैठक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण जल्द लागू करने को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह प्रावधान 2029 के आम चुनावों से लागू किया जा सकता है।

बैठक में खास तौर पर जमीनी स्तर पर महिलाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। नेताओं ने सुझाव दिया कि घर-घर संपर्क अभियान, महिला केंद्रित सेमिनार, डिजिटल माध्यमों और सामुदायिक बैठकों के जरिए महिलाओं को इस कानून के लाभ समझाए जाएं। इस कानून के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक-तिहाई हिस्सेदारी मिलेगी।

भाजपा इस कानून को लेकर देशभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति’ विजन के अनुरूप मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, 16 से 18 अप्रैल 2026 के बीच प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र में इस कानून को जल्द लागू करने के लिए जरूरी संवैधानिक संशोधनों पर विचार किया जा सकता है। इसमें जनगणना और परिसीमन से जुड़े पहलुओं में बदलाव भी शामिल हो सकते हैं।

इससे पहले सोमवार को नितिन नबीन ने भाजपा मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) के आयोजन की तैयारियों की भी समीक्षा की। इस दौरान संगोष्ठियों, रैलियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक न्याय और समानता के संदेश को मजबूत करने की योजना बनाई गई।

लगातार हो रही इन बैठकों से स्पष्ट है कि भाजपा संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सक्रिय रणनीति बना रही है। पार्टी का मानना है कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिक बनेगा।

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Created On :   7 April 2026 11:33 PM IST

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