भाजपा ने 'वंदे मातरम' कानून का पालन न करने पर कांग्रेस और कर्नाटक सरकार की आलोचना की

भाजपा ने वंदे मातरम कानून का पालन न करने पर कांग्रेस और कर्नाटक सरकार की आलोचना की
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को संसद द्वारा पारित एक कानून के खिलाफ जाने के लिए कर्नाटक में कांग्रेस और उसकी सरकार की आलोचना की, जिसमें किसी भी सरकारी कार्यक्रम या आधिकारिक समारोह में वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखे गए सभी पैराग्राफों को प्रस्तुत करने का प्रावधान है।

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को संसद द्वारा पारित एक कानून के खिलाफ जाने के लिए कर्नाटक में कांग्रेस और उसकी सरकार की आलोचना की, जिसमें किसी भी सरकारी कार्यक्रम या आधिकारिक समारोह में वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखे गए सभी पैराग्राफों को प्रस्तुत करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों के राज्य-गीतों में भी मातृभूमि के सामने सिर झुकाने का जिक्र है। उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रीय गीत पर सवाल उठाना चरमपंथी और अलगाववादी ताकतों के सामने घुटने टेकने जैसा नहीं है?

भाजपा नेता ने आरोप लगाया, "वंदे मातरम गाने के मुद्दे पर कांग्रेस अपने सहयोगी दलों से अलग-थलग पड़ गई है, सिर्फ़ मुस्लिम लीग ही उसके समर्थन में है।" त्रिवेदी का इशारा हाल ही में कांग्रेस द्वारा अपने सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस की आलोचना करने की ओर था। यह आलोचना जम्मू-कश्मीर के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर की गई थी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब यह एक कानूनी जरूरत है और इसका पालन करना ही होगा।

त्रिवेदी ने कर्नाटक सरकार के उस आदेश की भी आलोचना की जिसमें कहा गया था कि राज्य में सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत का हर नागरिक जानता है कि कोई भी राज्य विधानसभा संसद द्वारा पारित कानून के ख़िलाफ़ कोई कानून नहीं बना सकती। यह (राज्य का आदेश) न केवल ग़ैर-कानूनी और हास्यास्पद है, बल्कि कांग्रेस पार्टी की उस सोच को भी दिखाता है जिसके तहत वह संविधान को अपनी जेब में रखना चाहती है।"

उन्होंने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय महासचिव इलियास मुहम्मद थुम्बे की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के साथ उनकी "समझ" (अंडरस्टैंडिंग) थी ताकि अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा न हो। 2023 के राज्य चुनावों के दौरान उनके इस बयान के बाद से ही भाजपा इस विवादित संगठन के साथ कथित संबंधों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है।

यह बताते हुए कि कांग्रेस पार्टी ने इससे इनकार किया है, त्रिवेदी ने कहा कि एसडीपीआई, जो प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ़्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की कथित राजनीतिक शाखा है, ने "पहले 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही, फिर 54 सीटों पर और अंत में सिर्फ 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और इतनी बहादुरी से लड़ा कि सभी सीटें हार गई, और उनकी ज़मानत भी जब्त हो गई"। उन्होंने कहा कि इससे दोनों के बीच चुनाव को लेकर हुई गुप्त समझ के बारे में शक और गहरा गया।

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Created On :   10 Sept 2026 11:56 PM IST

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