बेलडांगा हिंसा एनआईए जांच जारी रहेगी या नहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट का राज्य सरकार को रुख स्पष्ट करने का निर्देश

बेलडांगा हिंसा एनआईए जांच जारी रहेगी या नहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट का राज्य सरकार को रुख स्पष्ट करने का निर्देश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा था कि वह इस साल जनवरी में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा और दंगे जैसी स्थिति की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जा रही जांच पर अपना रुख स्पष्ट करे।

कोलकाता, 10 जून (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा था कि वह इस साल जनवरी में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा और दंगे जैसी स्थिति की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जा रही जांच पर अपना रुख स्पष्ट करे।

इस साल की शुरुआत में जब एनआईए ने इस मामले की जांच शुरू की, तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस कदम को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अब सवाल ये है किपश्चिम बंगाल में नई सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को आगे बढ़ाएगी या एनआईए की जांच जारी रहने देगी।

इस मामले में कलकत्ता कोर्ट में भी एक केस दायर किया गया था। बुधवार सुबह अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने डिवीजन बेंच को बताया कि हालांकि राज्य सरकार सैद्धांतिक रूप से इस मामले में एनआईए की जांच जारी रखने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस बात पर अपनी राय देने के लिए और समय चाहिए कि क्या इस मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धाराएं लागू होंगी या नहीं।

इसके बाद, डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को अगले सप्ताह तक इस मामले में अपनी राय देने का निर्देश दिया।

इस साल जनवरी में पड़ोसी राज्य झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर बेलडांगा में हिंसा और दंगे जैसे हालात पैदा हो गए थे। प्रवासी मजदूर का शव बेलडांगा पहुंचने के बाद तनाव बढ़ गया था।

स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि झारखंड में धार्मिक और भाषाई कारणों से प्रवासी मजदूर की पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) की गई थी। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत बेलडांगा में रेल और सड़क मार्ग को जाम करने से हुई थी।

जब पुलिस ने जाम हटाने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने घात लगाकर हमला किया। प्रदर्शनकारियों ने कुछ पत्रकारों पर भी हमला किया, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए।

बाद में, झारखंड पुलिस ने एक बयान में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रवासी मजदूर की मौत को आत्महत्या का मामला बताया।

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Created On :   10 Jun 2026 4:05 PM IST

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