मध्य प्रदेश सीएम ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा, विपक्ष पर निशाना साधा
भोपाल, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को विधानसभा में गरमागरम बहस के दौरान महिला आरक्षण के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के प्रयासों का बचाव किया। उन्होंने परिसीमन और संवैधानिक प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित किया और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डाल दिया।
यादव ने जोर देकर कहा कि संवैधानिक संशोधन और परिसीमन प्रक्रिया के बिना प्रस्तावित महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों पर इस मुद्दे पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने पूछा कि आखिर वे चाहते क्या हैं, और कहा कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने परिसीमन रोक दिया था, और अब वे फिर से इसका विरोध कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण लागू होने में देरी से राजनीतिक प्रतिनिधित्व काफी हद तक सीमित हो गया है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में 543 लोकसभा सीटों में से केवल 74 सीटें ही महिलाओं के पास हैं, और यदि यह कानून पहले पारित हो गया होता तो यह संख्या काफी बढ़ सकती थी।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका उचित हिस्सा न देने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है।
मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए यादव ने कहा कि राज्य से महिला सांसदों की संख्या छह से बढ़कर 14 हो सकती थी, साथ ही विधानसभा में भी सभी श्रेणियों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के साथ प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती थी।
अपने हमले को और तीखा करते हुए यादव ने कांग्रेस पर जनगणना संबंधी कार्यों को रोकने और महत्वपूर्ण रिपोर्टों को दबाने सहित ऐतिहासिक चूक का आरोप लगाया।
उन्होंने आपातकाल के दौरान किए गए संवैधानिक संशोधनों को भी लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को सीमित करने के प्रयासों से जोड़ा।
यादव ने इस बहस को शासन व्यवस्था के व्यापक मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी राज्यों में समावेशी विकास सुनिश्चित किया है।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से वंशवादी राजनीति सहित स्थापित राजनीतिक ढांचों को चुनौती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने आम सहमति का आह्वान करते हुए सदस्यों से पक्षपातपूर्ण विचारों से ऊपर उठने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि दशकों से महिलाओं को उनका हक नहीं मिला है और अब इस अन्याय को सुधारने का समय आ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर विरोध महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है।
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Created On :   27 April 2026 10:20 PM IST












