अक्टूबर में पावर प्लांट्स को कोयला आपूर्ति में तेज सुधार, बिजली संकट की आशंकाओं को सरकार ने किया खारिज

अक्टूबर में पावर प्लांट्स को कोयला आपूर्ति में तेज सुधार, बिजली संकट की आशंकाओं को सरकार ने किया खारिज
कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अक्टूबर के दौरान बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट्स) को कोयले की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और बिजली संकट की आशंकाओं को लेकर सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्टें भ्रामक हैं। कोयला मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अक्टूबर में कोयले की आपूर्ति सितंबर की तुलना में औसतन 9 प्रतिशत अधिक रही है और सितंबर के निचले स्तर की तुलना में इसमें लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अक्टूबर के दौरान बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट्स) को कोयले की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और बिजली संकट की आशंकाओं को लेकर सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्टें भ्रामक हैं। कोयला मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि अक्टूबर में कोयले की आपूर्ति सितंबर की तुलना में औसतन 9 प्रतिशत अधिक रही है और सितंबर के निचले स्तर की तुलना में इसमें लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बिजली संयंत्रों में कोयला भंडार कम होने को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताओं के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और स्थिति पर केंद्र सरकार की करीबी निगरानी बनी हुई है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, अक्टूबर में रेलवे के माध्यम से कोयले की ढुलाई बढ़कर 465 रेक प्रतिदिन से अधिक के औसत स्तर पर पहुंच गई है। इतना ही नहीं, 470 रेक प्रतिदिन के लक्ष्य को लगातार तीन दिनों तक हासिल किया गया। सड़क मार्ग सहित अन्य माध्यमों से भी कोयला आपूर्ति में सुधार देखा गया है।

कोयला स्टॉक में कमी की गति भी अब काफी धीमी पड़ गई है। सितंबर में जहां बिजली संयंत्रों के भंडार में प्रतिदिन 0.243 मिलियन टन की कमी आ रही थी, वहीं अक्टूबर में यह घटकर 0.116 मिलियन टन प्रतिदिन रह गई है। मंत्रालय का कहना है कि स्थिति धीरे-धीरे स्थिर हो रही है, हालांकि भंडार में वास्तविक पुनर्निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बिजली संयंत्र को 'क्रिटिकल स्टॉक' श्रेणी में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसके पास कोयला समाप्त हो गया है या वह बंद होने की कगार पर है। यह केवल एक पूर्व चेतावनी संकेत है, जो तब जारी किया जाता है जब संयंत्र में निर्धारित मानक स्तर से कम भंडार रह जाता है।

बयान के अनुसार, ऐसे संयंत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार कोयले का पुनर्वितरण कर संवेदनशील बिजलीघरों तक पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।

मंत्रालय का मानना है कि मानसून के समाप्त होने और अक्टूबर के मध्य तक बिजली की चरम मांग में संभावित कमी आने के साथ स्थिति और बेहतर हो सकती है। यदि प्रतिदिन 465-475 रेक की आपूर्ति जारी रहती है, तो त्योहारी सीजन, सर्दियों और अगले वर्ष की गर्मियों की मांग से पहले कोयला भंडार को फिर से मजबूत किया जा सकेगा।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह रेल मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के साथ मिलकर पूरे देश में कोयले की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स की लगातार निगरानी कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी बिजली उत्पादन को कोयले की कमी के कारण प्रभावित न होना पड़े।

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Created On :   9 Oct 2026 4:14 PM IST

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