कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एसआईआर हाईजैक कर लिया है, स्थायी निवास प्रमाण पत्र रद्द करें भाजपा

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एसआईआर हाईजैक कर लिया है, स्थायी निवास प्रमाण पत्र रद्द करें  भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने सोमवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करके विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है।

चामराजनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने सोमवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करके विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दावा किया कि इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है और इस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य केवल भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार देना है और आरोप लगाया कि राज्य सरकार एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अब वे स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या हम सब अब तक यहां असुरक्षा में जी रहे थे? देश में लगभग 2 करोड़ बांग्लादेशी नागरिक हैं। अगर ऐसे लोगों को प्रमाण पत्र जारी किए गए तो उन्हें वापस भेजना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार ने अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए यह साजिश रची है।

अशोक ने कहा कि नागरिकता प्रदान करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। यदि यह पाया जाता है कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, तो केंद्र सरकार ही उसे उसके देश वापस भेजती है। पश्चिम बंगाल में पहले कांग्रेस की सहयोगी ममता बनर्जी सत्ता में थीं। उस समय कई बांग्लादेशी लोग आए थे, और कांग्रेस ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया।

उन्होंने कहा कि यदि कर्नाटक सरकार तुष्टीकरण का रुख अपनाती रही, तो सांप्रदायिक दंगे बढ़ेंगे। मुस्लिम संगठनों के खिलाफ पहले ही मामले वापस लिए जा चुके हैं। उन्हें खुश करने के लिए प्रमाण पत्र जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

अशोक ने आगे कहा कि अब तक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राज्य में सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा कर देनी चाहिए थी। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने केपीसीसी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से 10,000 करोड़ रुपए की मांग की। उन्होंने न तो कोई सर्वेक्षण कराया है, न ही सूखे की घोषणा की है, न ही चारे और पानी की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी दी है, फिर भी वे केंद्र से पैसे मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को राहत पाने के लिए पहले सर्वेक्षण कराना चाहिए और केंद्र को रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। केंद्र सरकार अपने अधिकारियों की टीम भेजती है, सर्वेक्षण कराती है, रिपोर्ट प्राप्त करती है और उसके बाद ही धनराशि जारी करती है। हर साल एसडीआरएफ के तहत राहत दी जाती है। सरकार को यह हिसाब देना चाहिए कि उस पैसे का क्या किया गया है। ऐसा करने के बजाय, वे केंद्र को दोष देने में लगे हुए हैं।

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Created On :   13 July 2026 7:05 PM IST

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