खड़गे ने मणिपुर की स्थिति पर भाजपा की आलोचना की, न्याय और स्थायी शांति की मांग की

खड़गे ने मणिपुर की स्थिति पर भाजपा की आलोचना की, न्याय और स्थायी शांति की मांग की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को हिंसाग्रस्त मणिपुर में मौजूदा स्थिति को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की। खड़गे ने कहा कि राज्य न्याय, सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और स्थायी शांति का हकदार है।

नई दिल्ली/इंफाल, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को हिंसाग्रस्त मणिपुर में मौजूदा स्थिति को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की। खड़गे ने कहा कि राज्य न्याय, सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और स्थायी शांति का हकदार है।

भाजपा की अक्षमता के कारण मणिपुर के फिर से खून बहने की बात कहते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि हिंसा की ताजा घटनाओं में चार निर्दोष नागरिकों की भयावह हत्या बेहद निंदनीय है। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।

उन्होंने कहा कि मई 2023 से अब तक 300 से अधिक अनमोल जानें जा चुकी हैं, जबकि 24,530 लोग दयनीय परिस्थितियों में राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। खड़गे ने कहा कि महिलाएं, बच्चे और कमजोर परिवार इस लंबी त्रासदी का खामियाजा भुगत रहे हैं। भाजपा की राजनीतिक चालों, चाहे राष्ट्रपति शासन लागू करना हो, मुख्यमंत्री को हटाना हो या अपनी सरकार को फिर से स्थापित करना हो, से शांति नहीं मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में दिए गए अपने तथाकथित आश्वासन पर बुरी तरह विफल रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य में जारी रक्तपात, कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में भाजपा की विफलता का एक गंभीर प्रमाण है।

खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने तीन सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि अमित शाह द्वारा जून 2023 में गठित शांति समिति का क्या हुआ? इस संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में शांति बहाल करने, नागरिकों की सुरक्षा करने और लगातार बनी हुई सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष यह जानना चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने आगे पूछा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत शिविरों में 31 अप्राकृतिक मौतों का मुद्दा उठाए जाने के बावजूद हजारों लोग अभी भी विस्थापित क्यों हैं? महिलाओं, बच्चों और विस्थापित परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए क्या किया गया है?

तीन साल से अधिक समय, 300 से अधिक मौतें, राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री परिवर्तन के बाद, शासन की इस घोर विफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा? खड़गे ने यह सवाल उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कार्रवाई करने से पहले कितने और निर्दोष लोगों की जान जानी बाकी है?

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य होने के नाते, इसकी सुरक्षा और स्थिरता को भाजपा के राजनीतिक स्वार्थ के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।

इस बीच, मणिपुर पुलिस के एक बयान में कहा गया है कि 19 अक्टूबर को कांगपोकपी जिले के सगोलमांग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत खोंगबल तंगखुल में लकड़ी इकट्ठा करने गए लगभग 14 ग्रामीणों के एक समूह पर संदिग्ध सशस्त्र आतंकवादियों ने गोलीबारी की। इस गोलीबारी में मैतेई समुदाय के तीन ग्रामीणों की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।

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Created On :   21 Oct 2026 7:50 PM IST

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