टीएमसी की सालाना 'शहीद दिवस' रैली के जवाब में 21 जुलाई को विरोध प्रदर्शन करेगी कांग्रेस

टीएमसी की सालाना शहीद दिवस रैली के जवाब में 21 जुलाई को विरोध प्रदर्शन करेगी कांग्रेस
पश्चिम बंगाल में अगले महीने दो मुख्य विपक्षी पार्टियां टीएमसी और कांग्रेस फिर आमने-सामने होंगी। 21 जुलाई को टीएमसी शहीद दिवस मनाती है, लेकिन इस साल 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस की सालाना 'शहीद दिवस' रैली के जवाब में कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करेगी।

कोलकाता, 27 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में अगले महीने दो मुख्य विपक्षी पार्टियां टीएमसी और कांग्रेस फिर आमने-सामने होंगी। 21 जुलाई को टीएमसी शहीद दिवस मनाती है, लेकिन इस साल 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस की सालाना 'शहीद दिवस' रैली के जवाब में कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करेगी।

तृणमूल कांग्रेस 21 जुलाई 1993 को वामपंथी सरकार के दौरान मारे गए 13 युवा कार्यकर्ताओं की याद में 'शहीद दिवस' रैली का आयोजन करती है। शुरुआत में 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाना कांग्रेस का कार्यक्रम होता था, लेकिन 1998 में ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने के बाद यह कार्यक्रम तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित किया जाने लगा। हालांकि, इस साल हुए विधानसभा चुनावों में टीएमसी को भारी हार का सामना करना पड़ा है, इसलिए पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 21 जुलाई को एक जवाबी रैली आयोजित करने का फैसला किया है।

कांग्रेस की इस जवाबी रैली का विषय और मांग थोड़ी अलग है। मांग यह है कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई राज्य सरकार को 21 जुलाई 1993 को हुई पुलिस फायरिंग के पीछे तत्कालीन पश्चिम बंगाल गृह सचिव मनीष गुप्ता की भूमिका की जांच करने वाली फाइलों को फिर से खोलना चाहिए।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार के अनुसार, 1993 में हुई उस पुलिस फायरिंग में तत्कालीन राज्य गृह सचिव मनीष गुप्ता की भूमिका बहुत अहम थी। मनीष गुप्ता बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे और 2011 से 2016 तक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पहली कैबिनेट में बिजली मंत्री भी रहे थे।

सुभंकर सरकार ने कहा, "उस समय, पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गृह सचिव मनीष गुप्ता प्रशासन में एक महत्वपूर्ण पद पर थे। पश्चिम बंगाल के लोगों को उस दिन की घटनाओं, प्रशासनिक फैसलों और फायरिंग के पीछे की असली सच्चाई जानने का अधिकार है। इसलिए, पूरी पारदर्शिता और सच्चाई सामने लाने के मकसद से 'मनीष गुप्ता फाइल' को तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए।"

कांग्रेस के एक और राज्य नेता ने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 2011 से 2026 तक अपने 15 साल के शासनकाल में, 21 जुलाई 1993 को हुई पुलिस फायरिंग में मनीष गुप्ता की भूमिका का पता लगाने के लिए कोई ठोस जांच क्यों नहीं करवाई।

बता दें कि मनीष गुप्ता ने 2011 में दक्षिण 24 परगना जिले की जादवपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी चुनाव के साथ 34 साल के वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) के शासन का अंत हुआ और तृणमूल कांग्रेस का दौर शुरू हुआ था।

अपने पहले ही चुनाव में मनीष गुप्ता ने बड़ा उलटफेर करते हुए पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को 16 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। उन्होंने 2011 से 2016 तक ममता बनर्जी की पहली कैबिनेट में बिजली मंत्री के तौर पर काम किया। हालांकि, 2016 में जादवपुर सीट पर उन्हें सीपीएम के सुजन चक्रवर्ती ने 14 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया। इसके बाद, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजा।

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Created On :   27 Jun 2026 12:46 PM IST

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