दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के रुख की आलोचना की

दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के रुख की आलोचना की
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल अपने महिला-विरोधी रवैये को लेकर बेनकाब हो गए हैं, जो संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान करने के उनके फैसले से साफ जाहिर होता है।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल अपने महिला-विरोधी रवैये को लेकर बेनकाब हो गए हैं, जो संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान करने के उनके फैसले से साफ जाहिर होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी समेत कुछ पार्टियां, संसदीय सीटों में बढ़ोतरी के साथ-साथ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का विरोध कर रही थीं।

सचदेवा ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि 1971 से 2009 के बीच, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के दौरान उसने संसद सीटों की संख्या बढ़ाने को जरूरी क्यों नहीं समझा।

उन्होंने कहा, "हम हमेशा से साफ़ थे कि इस नेक काम के लिए हमें विपक्ष के समर्थन की ज़रूरत है, जिसे उन्होंने देने से मना कर दिया, और अब वे भारत की 70 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं के सामने बेनकाब हो गए हैं।"

इससे पहले, लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "देश की महिलाएं, महिलाओं को आरक्षण देने के यज्ञ में विरोध की हड्डी डालने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी को कभी माफ़ नहीं करेंगी।"

उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं की भी आलोचना की, जिन्होंने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा उठाया था; उन्होंने आरोप लगाया कि यह तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित था।

उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इसके दो कारण हैं: पहला, आरक्षण की पात्रता ऐसी नहीं होनी चाहिए कि उसे धर्म परिवर्तन के ज़रिए हासिल किया जा सके; दूसरा, आरक्षण उन लोगों के लिए है जो सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखते हैं।"

गृह मंत्री ने प्रस्तावित परिसीमन का विरोध करते हुए उत्तर-दक्षिण का बँटवारा करने की कोशिश के लिए भी विपक्षी पार्टियों की आलोचना की।

उन्होंने कहा, "दक्षिणी राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तरी राज्यों का है। यहां तक कि छोटे से लक्षद्वीप का भी उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का है। इस देश को उत्तर बनाम दक्षिण के नैरेटिव के ज़रिए टुकड़ों में नहीं बाँटा जाना चाहिए।"

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Created On :   18 April 2026 12:02 AM IST

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